शादी में सुहागरात का मजा

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प्रेषक : कमल्प …

हैल्लो दोस्तों, यह बात कुछ साल पहले की है, जब में अपने साले की शादी में मेरे ससुराल गया था। मेरा ससुराल एक छोटे से गाँव में है और वो लोग बड़े ही परम्परावादी है, इसलिए मुझे भी कुछ दिनों पहले वहां पर जाना पड़ा। दोस्तों मेरे दो साले है, मेरे बड़े साले की पहले शादी हो चुकी है और अब मेरे छोटे साले की शादी थी। फिर जैसा कि वहां हर बार होता था, इस बार भी बहुत से मेहमान आने वाले थे। मेरे ससुराल के सभी लोग एक साथ रहते थे और उनका बहुत ही बड़ा परिवार है। फिर मेहमान आने लगे थे और मेरे बड़े साले के ससुराल वाले भी आ गए और उसमे मेरे बड़े साले की साली भी जिसका नाम निशा था। दोस्तों निशा की उम्र करीब 20-22 साल की होगी, वो बहुत ही सुंदर थी और इससे पहले मैंने निशा को मेरे बड़े साले की शादी के समय ही आखरी बार देखा था।

दोस्तों वो सभी बात पुरानी थी, निशा उस समय छोटी थी, लेकिन अब वो पूरी तरह से जवान हो चुकी थी और इस वजह से वो अब पहले से भी ज्यादा आकर्षक लगने लगी थी। दोस्तों वो लोग शाम के समय आए थे, लेकिन मेरी नज़र निशा पर रात को पड़ी और उस शादी के पहले महिला संगीत का कार्यक्रम चल रहा था वो कार्यक्रम एक भवन में था जो घर से कुछ दूरी पर था। फिर जब हम पहुंचे तब तक वो कार्यकर्म पहले ही शुरू हो चुका था, हम वहीं कुर्सी पर बैठ गये और फिर कुछ लड़कियाँ नाचने लगी थी और उस समय भी मैंने निशा को ठीक तरह से नहीं पहचाना था, लेकिन थोड़ी देर बाद मुझसे पता चला कि यह वही निशा है जिससे मेरी पिछली बार नोकझोंक भी हुई थी और उस बात के बारे में करीब करीब सभी को पता भी था। निशा ने उस समय घाघरा चोली पहनी हुई थी, वो बहुत ही सेक्सी लग रह रही थी और उस भीड़ में वो सबसे अलग थी। अब पूरी तरह से जवान हो चुकी निशा के अंदाज ही बिल्कुल बदल चुके थे, वो थोड़ी मोटी लेकिन उसने अपने बूब्स जबरदस्त सम्भाले रखा था और उसके बूब्स बहुत बड़े हो चुके थे और गहरे गले की चोली पहनने की वजह से उसकी उभरी हुई गोरी छाती साफ साफ नजर आ रही थी।

दोस्तों मेरी नज़र सिर्फ़ निशा पर थी, वो जब कमर मटका मटकाकर नाच रही थी तो उसकी अदायें बहुत ही सेक्सी थी और फिर जब कुछ देर बाद कार्यक्रम खत्म हो गया, तब मेरे बड़े साले की पत्नी ने निशा को हम सभी से मिलवाया। फिर उसी समय मैंने निशा को याद दिलाकर उससे पूछा क्यों तुम तो मुझे पहचानती होगी? वो शायद भूल चुकी थी और फिर मैंने उसको वो बात याद दिलाई। अब वो शरमा गई और उसने मुझसे कहा कि जीजू आप वो पुरानी सभी बातें भूल जाए। अब मैंने उससे कहा कि मैंने तो भूल चुका हूँ और फिर हम सभी लोग अब घर आने के लिए गाड़ी का इंतजार कर रहे थे, तभी एक कार आ गई जिसमे वो सभी बैठ गये और में अकेला ही बचा था। दोस्तों निशा उस गाड़ी की पिछली सीट पर खिड़की की तरफ बैठी हुई थी और मुझे बाहर खड़ा देखकर उसने थोड़ा सा सरककर मुझसे कहा कि जीजू आप भी यहीं बैठ जाए। अब मैंने उससे कहा कि में बाद में आ जाऊंगा, वो कहने लगी कि कोई बात नहीं है आप भी बैठ जाए हमें घर तक ही जाना है। फिर में उसके कई बार कहने पर उसके पास बैठ गया और अब उसका पूरा गरम गोरा बदन मेरे शरीर से टकरा रहा था और गलती से कुछ देर बाद उसकी मोटी मोटी जांघ पर मेरा एक हाथ चला गया, लेकिन उसने बिल्कुल भी विरोध नहीं किया।

दोस्तों अब मैंने मन में एक शैतान था वो अब जाग चुका था और उसकी वजह से मेरे मन में उसके लिए अब बहुत गलत विचार आने लगे थे। फिर रात को खाना खाते समय निशा कुछ लड़कियों के साथ में खाना खा रही थी और निशा ने मुझे आते देख मुझसे कहा कि जीजू आप भी खाना खा लो। अब मैंने उससे कहा कि में अभी नहीं कुछ देर बाद खा लूँगा, तभी उसने मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा क्या आपका कोई और प्रोग्राम है? मैंने कहा कि नहीं कुछ भी नहीं मुझे अभी भूख नहीं है। अब उसने मुस्कुराते हुए कहा कि आपको जो कुछ भी अच्छा लगे आप मेरी प्लेट से खा लीजिए, मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है अगर तुम इतना कहती हो तो में तुम्हारे साथ ही खाना शुरू करता और अब हम दोनों साथ ही खाने लगे। दोस्तों निशा अब धीरे धीरे मुझसे खुलती ही जा रही थी और वैसे मैंने भी उसके बहुत करीब आना चाहता था और फिर उसने मुझे बताया कि वो अभी एक कॉलेज में है और वो बहुत आगे तक पढ़ाई करके डॉक्टर बनना चाहती है। अब मैंने उससे कहा कि तुम्हारे विचार बहुत अच्छे है तुम्हे बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और अब मैंने धीरे धीरे उसको अपनी बातों में फंसाना शुरू किया। फिर मैंने उससे कहा कि आज तुम बहुत अच्छा डांस कर रही थी और हर कोई तुम्हारे डांस की तारीफ कर रहा था और आज वैसे तुम दिख भी बहुत सुंदर रही हो।

अब उसने मुस्कुराकर शरमाते हुए अपनी तारीफ के लिए धन्यवाद कहा। दोस्तों निशा एक बड़े शहर की पढ़ीलिखी लड़की थी, इसलिए वो बहुत ही खुले विचारों की थी। अब वो मुझसे बहुत ही खुलकर बातें कर रही थी, मैंने उससे पूछा तेरा किसी लड़के से लफड़ा तो नहीं है? वो यह बात सुनकर शरमाने लगी और फिर वो कहने लगी कि सब पढ़ाई के बाद अभी कुछ नहीं और उससे बात करते समय बीच बीच में मेरी नज़र निशा के बूब्स पर जा रही थी और इस बात को वो भी समझ रही थी और इसलिए वो बार बार अपनी चुन्नी को ठीक करके अपनी छाती को छुपाने की कोशिश कर रही थी। दोस्तों मेरा पापी मन अब पूरी तरह से बिगड़ चुका था और अब उसको पाने के लिए में विचार बनाने लगा था, लेकिन मुझे लग रहा था कि यह काम बड़ा मुश्किल है और में डर भी रहा था। फिर मैंने खाना खाकर उससे कहा कि में अब चलता हूँ, उससे कहकर में मैंने वहां से निकल गया। रात को हम सभी बैठकर बातें कर रहे थे, उस समय निशा मेरे सामने बैठी हुई थी और उसने उस समय ढीला पंजाबी सलवार सूट पहना हुआ था। फिर कुछ देर बाद हमारी नज़रे मिलने लगी थी और अब में बहुत गौर से निशा की तरफ देख रहा था जिसके बारे में उसको भी पता था, लेकिन वो बार बार नजरे चुरा रही थी और बीच बीच में वो मेरी तरफ देख रही थी, जिसका मतलब साफ था कि कहीं ना कहीं उसके मन में भी कुछ चल रहा था।

दोस्तों वो रात ऐसे ही चली गयी, दूसरे दिन अब मेरा पूरा ध्यान निशा की तरफ़ ही था और कुछ देर बाद मैंने विचार बनाया। दोस्तों पास ही एक झरना है और हम सभी वहां जाने के बारे में सोच रहे थे। कुछ बच्चे तैयार भी हुए और मैंने निशा से कहा कि तुम भी चलो ना। फिर वो भी झट से तैयार हो गई, उस समय निशा ने चूड़ीदार टाइट सूट पहना था, जिसकी वजह से उसके बूब्स और भी बड़े आकार के लग रहे थे। दोस्तों पहली बार उसके बूब्स का वो आकार देखकर में बहुत हैरान रहा गया, इसलिए मेरी नज़र हर बार उसके बूब्स पर ही टिकी थी और अब उसको भी लगने लगा था कि में उसके बड़े आकार के गोल बूब्स को ही देख रहा हूँ। दोस्तों कार में वो मेरे पास में ही बैठी हुई थी और कुछ दूर चलने के बाद मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया और में उससे बातें करने लगा, वापस घर आते हमें शाम हो गई उस समय भी हम दोनों पास में बैठे हुए थे। फिर मैंने सही मौका देखकर अपने एक हाथ को उठाकर निशा के कंधे पर रख दिया। तभी उसने पलटकर मेरी तरफ देखा, लेकिन उसने मुझसे कुछ नहीं कहा और एक दो बार जब कार में झटका लगता तो मेरा हाथ उसके बूब्स को छू गया था।

फिर भी वो चुप ही रही और अब में उसके सामने ऐसा नाटक कर रहा था कि जैसे यह सब अंजाने में हो रहा है, लेकिन यह बात हम दोनों मन ही मन अच्छी तरह से समझ रहे थे कि यह सब हो क्या रहा है? अब अंधेरा बहुत हो चुका था और अब में एक बार उसके बूब्स को दबाना छूना चाहता था, क्योंकि मुझे इससे अच्छा मौका दोबारा नहीं मिल सकता था। अब मैंने एक बार फिर से अपने एक हाथ को उसकी जांघ पर रख दिया और मेरा दूसरा हाथ अब भी उसके कंधे पर था। फिर मौका पाकर अपने एक हाथ से जो जांघ पर रखा था उसके बूब्स पर रख दिया और पूरा बूब्स अपने हाथ में ले लिया और ज़ोर से दबा दिया। अब वो मेरी तरफ गुस्से से देखने लगी, मैंने उससे पूछा क्यों क्या हुआ? वो बोली कुछ नहीं और उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया, वो अब भी गुस्से में थी। फिर मैंने उससे कहा कि यार कुछ नहीं हुआ और धीरे से में उससे बोला नाराज़ मत हो। अब वो बोली कि हम सबके सामने ऐसा कर रहे है यह गलत है, उसी समय मैंने उससे कहा कि यह सब अभी छोटे बच्चे है और अंधेरा भी अब बहुत हो चुका है। दोस्तों अब मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई इसलिए अब में धीरे धीरे उसके बूब्स दबाने लगा और वो हल्का सा विरोध भी कर रही थी और इस तरह से कुछ घंटो बाद हम घर आ गए।

दोस्तों अब मैंने आज रात को ही निशा को चोदने का विचार बना लिया था, लेकिन मुझे मौका ही नहीं मिल रहा था क्योंकि कल शादी थी इसलिए सभी लोग जाग रहे थे और वो अपनी अपनी तैयार में लगे थे, लेकिन मेरा मन अभी तक बहुत बेचैन था। फिर इस बीच निशा ने थोड़ा ज़ोर से कहा कि में कपड़े बदलकर अभी आती हूँ, यह उसने मुझे सुनाते हुए कहा था और वो तुरंत ऊपर चली गयी। फिर कुछ देर बाद में भी मौका पाकर ऊपर चला गया, वहां उस समय कोई भी नहीं था। अब मैंने देखा कि निशा जिस कमरे में थी उसकी लाइट जल रही थी और में पास वाले कमरे में चला गया और निशा के बाहर निकलने का इंतजार करने लगा और कुछ देर बाद जैसे ही निशा उस कमरे से निकली मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़कर में उसको कमरे के अंदर ले आया। अब वो बोली क्या है और यह सब क्या हो रहा है? दोस्तों उस समय उसके चेहरे पर बनावटी गुस्सा था। अब वो बोली मुझे यहाँ क्यों लाए हो? मैंने कहा कि मुझे यही बात करनी है। फिर वो बोली क्या बात करनी है जल्दी बोलो? मैंने हिम्मत जुटाकर उसको अपनी बाहों में भर लिया और वो कुछ कहती उसके पहले मैंने उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर चूसने लगा। अब वो अपने आपको छुड़ाने का हल्का सा विरोध कर रही थी, लेकिन मैंने उसको कसकर पकड़ रखा था और मेरे दोनों हाथ उसकी कमर पर लिपटे हुए थे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर वो अपने आपको छुड़ाते हुए बोली, गाड़ी में इतना सब किया तब भी क्या जी नहीं भरा? मैंने कहा कि उससे तो मेरी प्यास ज्यादा बढ़ गई। अब में अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबाने लगा, तभी उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और वो बोली जीजू नहीं जाने दो कोई आ जाएगा। अब मैंने कहा कि कोई नहीं आएगा और फिर से में उसके बूब्स को दबाना लगा। मेरा लंड भी अब तन चुका था और निशा की चुदाई करने को बड़ा बेकरार था। अब वो छुड़ाकर जाने लगी और तभी मैंने उसको पीछे से पकड़ लिया और अपना तना हुआ लंड मैंने उसकी गांड पर लगा दिया, जिसकी वजह से मेरे खड़े लंड का अहसास उसकी कोमल गांड को होने लगा और फिर में अपने दोनों हाथों को आगे लाकर उसके दोनों बूब्स को दबाने लगा, वाह क्या मस्त मज़ेदार बूब्स थे उसके? एकदम टाइट और वो मेरे हाथों में समा भी नहीं रहे थे। अब निशा मुझसे कहने लगी, जीजू प्लीज अब छोड़ दो ना कोई आ गया तो हम दोनों फंस जाएगें। फिर मैंने उससे कहा कि में एक शर्त पर छोड़ सकता हूँ कि तुम मुझे कल दिन में मिलना। अब वो बोली हाँ ठीक है और फिर मैंने उसको छोड़ दिया।

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फिर वो भागकर बाहर चली गई और कुछ देर बाद में भी नीचे आ गया। उस समय निशा की नज़र मेरे ऊपर थी और में भी उस पर नजर जमाए हुए था और फिर ऐसे ही कुछ घंटो बाद सुबह हो गई आज शादी थी और सुबह से ही रस्म शुरू हो गई। दोस्तों वो दोपहर का समय था मैंने मौका देखकर निशा को समझाया उससे कहा कि जब बारात निकल जाएगी तो घर पर कोई नहीं होगा और हम बारात के बीच से घर वापसा आ जाएगें और अपना काम खत्म करके फिर से बारात में आ जाएगें, किसी को कोई शक भी नहीं होगा। अब उसने कहा कि हाँ ठीक है, लेकिन कोई रिस्क तो नहीं है? मैंने कहा कि नहीं बिल्कुल भी नहीं और फिर दोपहर की तेज धूप में करीब एक बजे बारात निकली प्लान के अनुसार में कुछ दूर जाने के बाद निशा को खोजने लगा, लेकिन वो नहीं मिली। फिर किसी को शक ना हो इसलिए मैंने बच्चो से बहुत तरीके से पूछा कि तुम्हारी निशा दीदी नहीं दिख रही? तुम उसको भी नचाओ वो बहुत अच्छा डांस करती है। अब एक बच्चे ने कहा कि उनके सर में दर्द हो रहा है इसलिए वो नहीं आई, यह बात सुनकर में मन ही मन बहुत खुश था। फिर में सभी लोगों से नज़रे चुराता हुआ घर पहुंचा, उस समय घर पर कोई नहीं था और उस कमरे पर भी ताला लगा था।

अब में इधर उधर देखने लगा, लेकिन वो नहीं दिखी और मैंने सोचा कि उसने मुझे कहीं पागल तो नहीं बना दिया? तभी खिड़की थोड़ी सी खुली और निशा ने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा पीछे के दरवाजे से अंदर आ जाओ। फिर में तुरंत ही खुश होकर पीछे से कमरे के अंदर पहुंच गया और उस कमरे में अंधेरा था और हल्की सी रोशनी एक छोटी सी खिड़की से आ रही थी। अब मैंने ज्यादा समय खराब करना उचित नहीं समझा और वो भी बहुत अच्छी तरह से जानती थी कि में उसको यहाँ क्यों लाया हूँ? मैंने तुरंत उसको बाहों में भरकर में उसके होंठ को चूसने लगा और अब वो भी मेरा पूरा सहयोग दे रही थी और में उसके होंठो को चूस रहा था। फिर मैंने बिना देर किए उसकी कुरती को उतार दिया जिसकी वजह से अब वो सफेद रंग की ब्रा में थी, में पहली बार उसको इस हालत में देख रहा था और मेरे हाथ उसके बूब्स दबा को रहे थे। फिर एक हाथ को उसकी पीठ पर ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और अब पहली बार निशा को ऊपर से नंगा देखकर में पागल हो गया, उसके बाद मैंने सीधे अपने मुहं को उसके बूब्स पर लगा दिया और में पागलो की तरह उसके बूब्स को चूसने लगा।

फिर मैंने सही मौका देखकर उसकी सलवार को भी खोल दिया और उसके बाद मैंने अब अपनी शर्ट को भी उतार दिया। वो पलंग पर लेट गई और में अपने कपड़े उतारने लगा। अब वो पूरी तरह से मेरे सामने नंगी थी, वाह उसका क्या गोरा चिकना बदन था? में पास में बैठकर उसके बदन पर हाथ फेरने लगा और फिर उसने मेरे लंड को एकदम तना हुआ देखकर पकड़ लिया और वो लंड को सहलाने लगी। अब मैंने निशा से पूछा कि क्या कभी तुमने ऐसा किया है? उसने कहा कि हाँ, मैंने उससे पूछा कि कब? वो बोली कि अभी कुछ दिनों पहले और अब यह मत पूछना कि किसके साथ मैंने यह सब किया है? फिर मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली को डाल दिया। मुझे महसूस हुआ कि वो अब तक पूरी तरह गीली हो चुकी थी और अब में भी उसकी चुदाई करने के लिए तैयार था, इसलिए में उसके पैरों के बीच में आ गया और उसके पैरों को मैंने पूरा फैलाया और में चूमने लगा। अब वो बोली प्लीज ज्यादा देर मत करो अब शुरू भी करो ना, मैंने कहा कि हाँ ठीक है और अब मैंने अपना पूरी तरह खड़ा लंड उसकी चूत के मुहं पर रखकर उसकी चूत में अपने लंड का टोपा रगड़ने लगा जिसकी वजह से वो जोश में आकर सिसकियाँ लेने लगी और अपनी मदहोश आवाज़ में बोली जान प्लीज जल्दी करो ना।

फिर मैंने उसका वो जोश देखकर अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी गीली चूत में धीरे धीरे डालने लगा और वो भी अपनी गांड को उठाकर लंड को अपने अंदर लेने की कोशिश करने लगी। फिर मैंने धक्का दिया 25% ही अंदर गया था और वो दर्द की वजह से आहें भरने लगी थी और उसी समय मैंने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा। दोस्तों अब मेरे पास सही मौका था कि में अपने लंड को पूरा का पूरा उसकी चूत में डाल दूँ इसलिए मैंने एक जोरदार झटका मार दिया जिसकी वजह से 75% लंड अंदर चला गया। दोस्तों अगर में ठीक समय पर उसके होंठो को नहीं चूसता तो वो इतना ज़ोर से चिल्लाती कि सभी पड़ोस के लोग आ जाते और अब वो मुझसे कहने लगी कि मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है, प्लीज़ धीरे धीरे डालो। अब मैंने उससे कहा कि अभी सब ठीक हो जाएगा, मैंने अपने धक्को की स्पीड को पहले से तेज कर दिया और कुछ देर बाद वो भी अपनी गांड वो ऊपर नीचे करके मेरा सहयोग करने लगी। अब मैंने उससे पूछा क्या तुम्हे दर्द हो रहा है? उसने कहा कि नहीं मज़ा आ रहा है। अब मैंने अपनी स्पीड को बढ़ा दिया, वो सिसकियाँ भरने लगी आह्ह्ह उफ्फ्फ करने लगी और उसकी वो आवाज़ मुझे और मदहोश कर रही थी। फिर कुछ देर में निशा झड़ गई, जिसकी वजह से उसकी चूत और भी गीली हो गई।

अब मेरा लंड बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रहा था और उसके हाथ मेरी कमर पर थे। में पूरा पसीना पसीना हो गया था और तभी मुझे लगा कि में अब झड़ जाऊंगा। फिर मैंने तुरंत ही अपना लंड बाहर निकाल लिया और अपना पूरा का पूरा वीर्य मैंने निशा के पेट पर निकाल दिया। उस समय निशा बहुत संतुष्ट लग रही थी। फिर उसने मुझसे कहा कि अब आप जाओ, मैंने अपने बदन को साफ किया और झट से कपड़े पहनकर में बाहर निकल गया और इस तरह मैंने पहली बार निशा को चोदा और में वापस बारात में जाकर शामिल हो गया और किसी को पता भी नहीं चला। फिर कुछ ही देर में निशा भी वहां पर आ गई और मैंने उसकी तरफ देखा तो वो भी नजरे मिलाकर वो मेरी तरफ मुस्कुराने लगी, लेकिन मैंने अनदेखा कर दिया। दोस्तों उस समय मैंने सोचा कि कहीं किसी को शक ना हो जाए। बारात अब पहुंचने ही वाली थी और वहां पहुंचकर हम लोग खाना खाने में व्यस्त हो गए और निशा भी उस समय मेरे पास खड़ी होकर खाना खा रही थी। दोस्तों अब में एक बार फिर से निशा की चुदाई का विचार करने लगा, क्योंकि पहली बार जल्दी जल्दी में मुझे वो मज़ा नहीं आया। अब मैंने सोचा कि अब मुझे दोबारा चुदाई का मौका मिला तो में कंडोम लगाकर चुदाई करूंगा, लेकिन उसके लिए पहले निशा से बात करनी बड़ी ज़रूरी थी।

दोस्तों मुझे वो मौका नहीं मिल रहा था, जिसका में फायदा उठाकर अपने काम को खत्म करता, करीब सात बजे शादी से फ्री होकर सभी घर जा रहे थे, तब मैंने निशा को अपने पास बुलाया और उससे कहा कि निशा मुझे तुमसे कुछ काम है। अब वो पूछने लगी आपको अब क्या काम है? उस समय उसकी आवाज़ में थोड़ी नाराजगी थी। अब मैंने उससे कहा यार मज़ा नहीं आया कुछ और प्लान बनाओ ना, उसने कहा कि अब कुछ नहीं हो सकता। फिर मैंने उससे कहा कि तुम तुम तैयार हो जाओ उसके बाद में कुछ ना कुछ कर लूँगा। अब उसने कहा कि हाँ ठीक है आप जानो यह शब्द सुनकर में खुशी से झूम उठा। फिर रात को खाने का प्रोग्राम था, सभी लोग तैयार हो रहे थे तभी निशा उसी कमरे में जा घुसी जहाँ मैंने उसको पहली बार चोदा था, शायद वो तैयार होने गई थी। फिर कुछ देर के बाद निशा भी पहुंच गई। उसने नीले रंग का लहंगा पहना था, वो क्या मस्त सेक्सी लग रही थी और उसके बूब्स अब और भी साफ साफ नज़र आ रहे थे। अब मैंने उसके पास जाकर उससे कहा कि तुम बहुत अच्छी लग रही हो और उसने तारीफ के लिए धन्यवाद कहा, उसी समय मैंने उससे कहा क्यों क्या विचार है? उसने कहा कि कोई मौका नहीं है, अभी घर में बहुत लोग आराम कर रहे है क्योंकि सभी इतना थक गये है कि कोई भी यहाँ आना नहीं चाहते।

अब मैंने उससे कहा कि कोई बात नहीं मेरे पास एक बहुत अच्छा प्लान है, तभी उसने मुझसे कहा कि आपका दिमाग़ कहीं और भी चलता है कि दिन भर आप यही बातें सोचते रहते हो? फिर मैंने उससे कहा यह सब तुम्हारी वजह से है तुम्हे देखकर में पागल हो जाता हूँ और वो प्रोग्राम खत्म हो गया और हम घर आ गए। अब मैंने धीरे से निशा से पूछा तुम सोओगी कहाँ? वो बोली कि वहीं बच्चो के साथ, मैंने उससे कहा कि ठीक है में आ जाऊंगा। फिर रात को करीब तीन बजे में उठा और में निशा के कमरे की तरफ गया उसका दरवाजा खुला था, मैंने निशा को उठाया तो वो हड़बड़ा गई। मैंने कहा चुप उस समय निशा मेक्सी में थी। मैंने उसको इशारे से पीछे आने को कहा। फिर वो आ गई और में उसको सीधे छत पर ले गया, वो बोली यह क्या है जीजू? आप मुझे यहाँ क्यों लाए हो? अब मैंने उससे कहा कि कोई भी कमरा खाली नहीं है इसलिए हमे यहाँ आना पड़ा। अब वो बोली जीजू आप बहुत बदमाश हो और फिर दोनों बैठ गये। अब उसने मुझसे कहा कि जीजू आप मेक्सी को उतारना मत, मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है और अब वो बिना किसी नाटक नखरे के लेट गई। फिर मैंने पैरों से उसकी मेक्सी को ऊपर किया और उसकी पेंटी को उतार दिया। उसके बाद मेक्सी को ऊपर करके ब्रा को भी खोल दिया और अब मैंने उसके बूब्स को आज़ाद कर दिया।

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फिर मैंने उसकी मेक्सी को ऊपर तक उठा दिया, जिसकी वजह से वो पूरी नंगी हो चुकी थी। अब मैंने अपने भी कपड़े उतार दिए, मेरा लंड तो पहले से ही जोश में था। वो निशा के बिल में जाने के लिए फूंकार मार रहा था। दोस्तों ऊपर छत पर पंडाल लगा हुआ था और चारों तरफ से बंद था इसलिए कहीं से किसी के देखने का खतरा भी हमें नहीं था। अब मैंने निशा को चूमना शुरू किया, साथ ही में बूब्स को चूसने और दबाने भी लगा था। ठंडी ठंडी हवा पर्दों से छन छनकर आ रही थी और हम दोनों को मधहोश कर रही थी। अब हम दोनों उस खेल में इतना खो गए कि हमे बिल्कुल भी होश नहीं था कि हम लोग कहाँ है? मैंने उसको प्यार कर रहा था उसकी चूत अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और अब मैंने अपने तने हुए लंड पर कंडोम लगाया और उसकी चूत के मुहं पर रख अंदर डालने लगा। फिर उसने अपने पैरों को फैलाया और वो लंड को अंदर लेने की कोशिश करने लगी। वो अपनी गांड को भी उठा रही थी। फिर मैंने उसके पैरों को मोड़ दिया और में लंड को डालने लगा। मेरा लंड धीरे धीरे अंदर जा रहा था और वो सईईईई आईईईइ कर रही थी। दोस्तों एक ही बार में मेरा पूरा लंड उसकी गीली चिकनी चूत में  जा चुका था।

अब मैंने निशा को अपने ऊपर ले लिया और उसकी मेक्सी को उतार दिया और अब उसके बूब्स को मसलते हुए मैंने उसको ऊपर नीचे होने को कहा और वो ऐसा ही करने लगी। फिर बहुत देर तक ऐसा ही चलता रहा। कभी वो ऊपर या नीचे आ जाती और उस समय भी वो ऊपर थी और झड़ गई। अब मैंने उसको नीचे किया और में एक बार फिर से उसको ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा और वो मुझसे कहने लगी कि जान तुम ऐसा क्या खाकर आए हो जो ठंडा होने का नाम ही नहीं लेते। फिर मैंने उससे कहा कि कुछ नहीं यह तुम्हारा प्यार है। उसके बाद मेरी स्पीड बढ़ती चली गई और फिर में भी झड़ गया। उसके बाद हम दोनों अलग हुए और मैंने कंडोम को दूर फेंककर देखा, निशा अभी भी लंबी लंबी साँसे ले रही। फिर मैंने उससे पूछा क्या हुआ थक गई? वो कहने लगी कि अब में जा रही हूँ। तब मैंने उससे कहा क्या तुम्हे जाने की ज्यादा जल्दी है? और फिर मैंने उसको दूसरी बार चुदाई के लिए मनाया और बहुत बार कहने के बाद वो मान गई। फिर मैंने उससे कहा कि हम दोबारा ना जाने कब मिलेंगे? मैंने दोबारा से एक बार फिर से उसको जमकर चोदा और फिर करीब बीस मिनट के बाद हम दोनों ही पस्त हो गये।

अब दोनों ने कपड़े पहने और नीचे आ गये। उस समय सुबह के पांच बज चुके थे। कहीं कोई उठ ना जाए इसलिए हम दोनों जाकर अपनी अपनी जगह पर सो गये। दोस्तों दूसरे दिन सुबह में देर तक सोता ही रहा और जब में उठ तब घर में बड़ा शौर था और सभी मेहमान अब वापस जाने की तैयार कर रहे थे, लेकिन निशा मुझे कहीं दिखाई नहीं दे रही थी इसलिए मेरी नजर बस उसको ढूंड रही थी। फिर मैंने सोचा लगता है कि वो अभी तक सो रही होगी, लेकिन थोड़ी देर बाद मैंने देख कि निशा की मम्मी पापा जाने की तैयारी कर रहे थे। अब मैंने सोचा कि लगता है निशा अभी नहीं जा रही है, लेकिन अगले ही पल वो मुझे देखी और वो अब मुझसे नज़रे चुरा रही थी। अब मैंने उससे पूछा क्या तुम जा रही हो? उसने कहा कि हाँ। अब मैंने उससे कहा कि जल्दी क्या है? वो बोली कि पापा को काम है। अब मैंने उससे कहा कि तुम रुक जाओ। फिर बोली कि नहीं मुझे कॉलेज जाना है, मैंने कहा कि हाँ ठीक है, लेकिन तुम मुझे यह बताओ कि दिन वाली फिल्म अच्छी थी या रात वाली? वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर मुस्कुराई और बोली कि दोनों ही अच्छी थी। अब मैंने उससे उससे पूछा कि ज्यादा अच्छी कौन सी थी? वो शरमाते हुए बोली कि रात वाली। अब मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है जाओ, लेकिन हमें तुम भूल ना जाना और वो चली गई। दोस्तों उसके बाद कभी निशा से मेरी दोबारा मुलाकात नहीं हुई ।।

धन्यवाद …

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