सपनों की रानी की चुदाई

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प्रेषक : संजय …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम संजय है और आज में आप सभी को कामुकता डॉट कॉम पर अपनी एक सच्ची चुदाई की घटना सुनाने आया हूँ, जिसमे मैंने अपने सपनों की रानी के साथ वो सब किया जिसको में हमेशा करना चाहता था। दोस्तों आप सभी की तरह में भी बहुत समय से सेक्सी कहानियों के मज़े लेता आ रहा हूँ और आज अपने उस सौदे के साथ चुदाई के वो मस्त मज़े भी लिखकर आप सभी की सेवा में भेज रहा हूँ जिनमे मैंने बड़े मस्त मज़े किए। दोस्तों मैंने पूजा को हमेशा पार्टी या किसी शादी के प्रोग्राम में ही देखा था, पूजा समाज की एक मानी हुई हस्ती थी। दोस्तों वो कामयाब औरत होने के अलावा एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थी और वो इसलिए अक्सर उसके किसी ना किसी सामाजिक कार्य के लिए चर्चित रहती थी। पूजा का आकर्षक व्यक्तित्व और उसका वो सुंदर गोरा बदन किसी भी मर्द को उसकी तरफ आकर्षित कर सकता था। फिर एक बार एक समारोह में मुझे उसके पास में बैठने का मौका मिला और अब में उसके साथ बात करना चाहता था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब उसको किसी प्रोग्राम में जाना था और वो एक अलग सी छाप मेरे दिल में छोड़कर चली गयी। दोस्तों पूजा की एक एड्वर्टाइज़िंग कंपनी थी, जिसको वो बेचना चाहती थी और इस सिलसिले में वो मेरी सेक्रेटरी निशा से आपॉइंटमैंट बुक करना चाहती थी। दोस्तों मेरी एड कम्पनी अच्छी चल रही थी और ना में कोई कंपनी को खरीदने का इरादा भी रखता था।

फिर जब पूजा की कंपनी के बारे में मुझे एक बार निशा ने बताया तब से मैंने उसको पूछा कि क्या तुम उसके बारे में सब कुछ जानती हो? तब निशा ने जवाब दिया कि मेरा एक दोस्त उसके लिए काम करता है। फिर मैंने उसको पूछा कि तुम उसके बारे में कितना जानती हो? तब निशा ने जवाब दिया कि यही कि उसकी शादीशुदा जिंदगी अच्छी नहीं है, किसी कारण से उसका तलाक होने वाला है। पूजा एक बहुत ही मेहनती और ईमानदार महिला है, वो अपने साथ करने वालों का अपने परिवार के सदस्य जैसा ध्यान रखती है। अब मैंने कहा कि ठीक है, में उसको एक बार जरुर मिलूँगा और तब निशा ने हंसते हुए कहा कि में जानती थी आप उसको जरूर मिलेंगे। फिर पूजा ने मेरे कैबिन में इस तरह कदम रखा जैसे कि वो कैबिन उसी का हो, उसका ऑफिस में घुसने का अंदाज साफ कह रहा था कि वो एक बहुत ही अनुभवी काम को समझकर सही करने वालों समझदार औरत थी, वो दिखने में 5.4 इंच की थी। फिर वो मेरी टेबल की तरफ बढ़ी और मुझसे उसने हाथ मिलाया, तब मैंने भी खड़े होकर उसके साथ हाथ मिलाया और अपनी कुर्सी पर झट से बैठ गया। दोस्तों इस तरह की औरतें मुझे बहुत गरम कर देती थी और उनसे अपने खड़े लंड को छुपाना मुश्किल हो जाता था।

अब पूजा मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयी और अब उसने अपना ब्रीफकेस पास में रख लिया और मैंने देखा कि उस समय पूजा ने घुटने तक का काले रंग का स्कर्ट पहन रखा था, जिससे उसके आधे से ज़्यादा नंगे पैर साफ दिखाई दे रहे थे। अब उसको देखते ही मेरे लंड में एक सिरहन हुई और वो अकड़ने लगा था। फिर पूजा मुझे देखते हुए बोली कि संजय मुझे खुशी हुई कि तुमने मुझसे मिलने के लिए समय निकाल लिया मुझे मालूम है कि तुम अपने अपने काम में बड़े कामयाब हो चुके हो और अब आज इस समय मेरी कंपनी तुम्हारी कंपनी के मुक़ाबले कुछ भी नहीं है। अब मैंने उसको कहा कि मुझे भी आपसे मिलकर बड़ी खुशी हुई, तब पूजा बोली कि अब हम बात आगे बढ़ाए उसके पहले में तुम्हें कुछ दिखाना चाहती हूँ और फिर वो अपना ब्रीफकेस उठाने के लिए थोड़ी नीचे झुकी, जिसकी वजह से उसकी स्कर्ट थोड़ी और ऊपर खिसक गयी और उस वजह से उसकी जाँघो का ऊपरी हिस्सा मुझे साफ नजर आने लगा था। फिर उसने वापस घूमकर अपना ब्रीफकेस अपनी गोद में रख लिया, उसने अब ब्रीफकेस को खोलकर उसमे से एक फाईल निकाली और फिर ब्रीफकेस को बंद करके उसको अपने पैरों के पास रख दिया। अब इस दौरान उसने कई बार अपने पैर पर पैर चढ़ाए और अपने सैंडल को उतारे, जो एक औरत के लिए नॉर्मल सी बात है, लेकिन पूजा ने इस तरह से किया।

अब मुझे उसकी काली रंग की पेंटी साफ साफ दिखाई देने लगी थी। फिर वो खड़ी हो गयी और झुककर मुझे अपने पास की वो फाईल दिखाने लगी, तब मैंने अपनी तिरछी नजरों से देखा कि उसके गोरे बूब्स गहरे गले के ब्लाउज से साफ झलक रहे थे, उसने एक काले रंग की पारदर्शी जालीदार ब्रा पहनी हुई थी। फिर वो और टेबल पर झुकते हुए बोली कि संजय इस डील से तुम्हें पहले ही साल में 5 करोड़ का फ़ायदा हो सकता है, लेकिन मेरा ध्यान उसकी बैलेन्स शीट को देखने में कहाँ था? अब मेरा पूरा ध्यान तो उसकी असंतुलित छाती पर अटका था। फिर मैंने देखा कि उसके ब्लाउज के ऊपरी दो बटन खुले हुए थे, मुझे अच्छी तरह से याद है कि जब वो ऑफिस में आई थी और तब उसके ब्लाउज के सभी बटन बंद थे, जरूर उसने वो बटन जब वो अपनी ब्रीफकेस से फाईल निकाल रही थी तब खोले होंगे, मुझे यह औरत बड़ी चालाक और समझदार लगी थी। अब में भी इस खेल में उसका साथ देने लगा था, उसने मुझे फाईल के एक-एक पन्ने को दिखाते हुए जानबूझ कर अपना पेन जमीन पर गिरा दिया और फिर जब वो घूमकर पेन उठाने के लिए झुकी, तब उसके मस्त कुल्हे ठीक मेरे चेहरे के सामने थे। अब उसकी मस्त गांड को देखकर मेरा लंड एकदम तन गया था। फिर उसने पेन उठाया और टेबल पर झुक गयी में भी अपनी कुर्सी को थोड़ा सा पीछे खिसककर ऐसे बैठ गया था।

अब उस वजह से उसको मेरा लंड जो पेंट में तंबू बनाए हुए था और साफ नजर आ रहा था, लेकिन वो एकदम अंजान बने हुए मुझे पेपर्स समझाने लगी थी। अब फाईल के पन्ने पलटते हुए उसने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया था, तब मुझे उसके बदन से आने वाले पर्फ्यूम की महक आई, वो महक तो कमरे में पहले से फैली हुई थी किंतु में उसके बदन की सुंदरता में इतना खोया हुआ था कि महसूस नहीं कर पाया था। दोस्तों वो खुशबु गुलाब की थी या हीना की पता नहीं, लेकिन उसका नज़दीक होना और बदन से उठती खुशबु मुझे पागल किए जा रही थी। अब में उसको छूना चाहता था, लेकिन में अपने जज्बातों को ना जाने कैसे रोक रहा था। अब पूजा मुझे एक चीज समझा रही थी और में उसके बूब्स की गोलाईयों में खोया उसकी हाँ में हाँ मिला रहा था। अब मेरा मन तो कर रहा था कि उसकी प्यारी गांड पर अपना हाथ फैर दूँ, लेकिन जल्दबाज़ी में कहीं थप्पड़ ना पड़ जाए और यह सोचकर में चुप रह गया था। फिर मैंने सोचा कि चलो पैरों से शुरू करते है और फिर जैसे ही मैंने अपनी उंगली धीरे से उसके पैरों से छुई। फिर उस समय वो मेरी तरफ देखते हुए बोली कि संजय जहाँ तक में समझती हूँ तुम्हारी कंपनी खर्चों के मामले में कुछ ज़्यादा लापरवाह है, हमारी कंपनी एक प्लान के तहत ही खर्चा करती है और यह तुम्हारे काम आएगी, पैसों को पकड़कर जब्त करना चाहिए ना की खर्च करना।

अब मैंने उसके घुटनों को जब्त कर लिया, जब्त नहीं बल्कि अपनी पूरी हथेली को उसके घुटनों पर रख दिया था। फिर उसको इस बात का अहसास जरूर हुआ होगा, लेकिन वो फिर अंजान बनते हुए बोली कि संजय यह अच्छा समय है मार्केट में बहुत काम है और तुम अपने सभी सपने पूरे कर सकते हो। अब मुझे भी लगने लगा था कि वो भी मुझसे कोई खेल खेलते हुए मज़े ले रही है और फिर वो मुझे अपने और कामों के बारे में बताने लगी और में अपना हाथ धीरे-धीरे ऊपर बढ़ाने लगा। अब मेरा हाथ उसके घुटनों से होता हुआ उसकी जांघो पर था, उस समय ए.सी चालू होने के बाद भी मुझे गरमी लगने लगी थी। फिर मैंने अपने एक हाथ से अपनी टाई की गिठान को ढीला किया और अपने दूसरे हाथ से उसकी जाँघो को सहलाने लगा था। तभी वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और मुझे अपनी फाईल दिखाने और समझाने लगी, मेरा एक हाथ लगातार ऊपर की तरफ बढ़ रहा था और वो बिल्कुल अंजान बनी मुझे समझा रही थी। अब मेरा हाथ उसकी जांघो के अंदर के हिस्से पर रेंग रहा था, अगर वो इस समय मुझे रोकती, तो में नहीं जानता था कि में उस समय क्या करता? लेकिन मैंने अपने हाथ को नहीं हटाया। अब मेरा हाथ तब तक इसके आगे नहीं बढ़ सकता था, जब तक की वो अपने पैरों को थोड़ा और फैलाकर मुझे रास्ता ना दे।

फिर वो बोली कि संजय तुम्हारी कंपनी पुराना सॉफ्टवेयर पर काम करती है और हमारी कंपनी के माध्यम से तुम अभी की तकनिकी को काम ले सकोगे। फिर इससे तुम हर कंपनी की अंदर तक की जानकारी को बड़े आराम से हासिल कर सकोगे और यह बात कहते हुए वो अपने ब्रीफकेस से एक फाईल निकालने के लिए नीचे झुकी और इस दौरान उसने अपने दोनों पैरों को थोड़ा सा फैला दिया था। अब अंदर की जानकारी हासिल करने के लिए मेरे हाथों को रास्ता मिल चुका था। फिर मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर सरकाया तब मैंने पाया कि उसकी पेंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। अब वो अपने दोनों पैरों को और भी फैलाते हुए बोली कि संजय हमारी कंपनी के पास एक सॉफ्टवेयर है जिसकी मदद से कंपनी का हर आदमी किसी भी डाटा को चैक कर सकता है, तुम उन डाटाओ को भी पा सकते हो और वो हर किसी की पकड़ से कई हद के बाहर है। अब में और मेरा हाथ तो किसी और डाटा की तलाश में थे। फिर मैंने अपना हाथ उसकी गीली हुई चूत पर उसकी पेंटी के ऊपर रख दिया, उसकी पूरी पेंटी गीली हो चुकी थी और मेरी शर्ट भी पसीने में भीग चुकी थी। अब वो टेबल पर बैठ चुकी थी और बोली कि संजय हमारे पास में ऐसे वेब सर्वर है, जो हर समस्याओ को मिटा सकते है, तुम्हारे आदमी 24 घंटे किसी भी डाटा को पा सकते है। अब में उसकी चूत में उंगली किए जा रहा था।

तभी वो बोली कि रूको पहले रास्ते की दिक्कतों को हटाओ? तब मैंने धीरे से उसकी चूत को दबा दिया। फिर मैंने अपनी उंगलियाँ उसकी पेंटी के इलास्टिक में फँसाकर उसको थोड़ा सा नीचे सरकाना शुरू किया। अब पूजा अभी भी शांत बनी हुई मुझे अपनी कंपनी का हर डाटा समझा रही थी। फिर मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसाया, तब मुझे लगा जैसे कि मैंने किसी भट्टी में अपनी उंगली को डाल दिया हो, उसकी चूत से पानी बह रहा था। अब में अपनी दो उंगलियों से उसको चोद रहा था, लेकिन उस पर इस बात का बिल्कुल भी असर नहीं था। अब मैंने उसकी पेंटी उतारकर जमीन पर गिरा दी थी, जिसकी वजह से अब उसकी खुली हुई चूत मुझे आमंत्रित कर रही थी। फिर मैंने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर उसके टॉप को खोलना चाहा। तब पूजा मेरी आँखों में झाकते हुए बोली कि संजय तुम्हें हमारी कंपनी से बड़े फायदे हो सकते है और इससे तुम्हारे व्यापार में बड़ी तरक्की हो सकती है। अब में और भी ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत में अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा था। फिर उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों में पकड़कर पूछा कि अब मेरी कंपनी को खरीदने का और क्या लोगे? तब मैंने देखा कि वो इस डील को ख़त्म ही करना चाहती है और उसके लिए वो कुछ भी पेश कर सकती है, अपने आपको भी।

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फिर मैंने अपना फोन उठाया और इंटरकम पर अपनी सेक्रेटरी निशा का नंबर दबाया, उम्मीद थी कि वो दोपहर के खाने से वापस आ गयी हो और फिर वो बोली कि हाँ संजय। तब मैंने बोला कि निशा क्या तुम हमारे वकील के साथ बात करके कागजात तैयार कर सकती हो कि हम मिस पूजा की फर्म को तीन करोड़ में खरीद रहे है और पहले एक कन्फर्मेशन लेटर तैयार करके ले आओ। अब निशा बोली कि हाँ में अभी लेकर आती हूँ। दोस्तों निशा अपने काम में बड़ी ही होशियार थी और जब में निशा से बात कर रहा था, तब पूजा की स्कर्ट को ऊपर उठाता रहा। अब उसकी जांघे और चूत एकदम नंगी हो चुकी थी, उसकी गुलाबी चूत और हल्के-हल्के भूरे बाल मुझे साफ दिखाई दे रहे थे। फिर पूजा मेरी तरफ देखती हुई बोली कि संजय इस डील का तुम्हें मुझे कुछ एड्वान्स भी देना होगा? तब मैंने पूछा कि पूजा क्या एड्वान्स देना होगा? तब वो बोली कि तुम्हें मुझे एक बार चोदना होगा, अपना लंड अपनी पेंट से बाहर निकालो, में पिछले एक घंटे से सहन किए जा रही हूँ, जल्दी से अपने लंड को मेरी चूत में डालकर मुझे ज़ोर से चोदो। अब जैसा पूजा ने कहा था, वैसे ही में खड़ा होकर उसके पीछे आ गया और पूजा टेबल पर झुककर घोड़ी बन गयी थी।

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फिर मैंने अपनी पेंट और अंडरवियर को उतार दिया, पूजा ने अपने दोनों पैरों को एकदम फैला दिया था, जिसकी वजह से उसकी चूत का मुँह पूरा खुल गया था। फिर पूजा ने मेरी तरफ अपनी गर्दन घुमाकर कहा कि तुम मुझे पहले ही बहुत देर तक इतना गीलाकर चुके हो कि तुम्हारा जी चाहे वैसे और उतने ज़ोर से चोद सकते हो। फिर मैंने अपने लंड को थोड़ी देर तक उसकी चूत पर रगड़ा और धीरे से अपने टोपे को अंदर घुसाया। अब जैसे ही मेरे लंड का टोपा उसकी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुसा, उसके मुँह से सिसकियाँ निकल पड़ी वो मुझसे कहने लगी, वाह संजय तुम्हारा लंड कितना बड़ा है? मैंने सुना था तुम्हारे लंड के बारे में कि यह बहुत बड़ा है और तुम चुदाई भी बहुत अच्छी करते हो। अब मैंने अपने लंड को पूरा उसकी चूत में घुसाते हुए कहा कि कहाँ सुना तुमने यह? तब वो बोली कि संजय इस तरह की बातें सोसाइटी में बहुत जल्दी फैलती है, एक औरत से दूसरी औरत तक और फिर सड़कों पर, लेकिन संजय सुना है कि तुम चोदने में बहुत अनुभवी हो और औरत को चुदाई का पूरा मज़ा भी देते हो, मैंने यह भी सुना है कि तुम गाड़ी और औरत की ऐसी हालत कर देते हो कि उसको दूसरी बार लेने वाला सोचता है कि यह क्या ले लिया मैंने?

अब मेरी गाड़ी को भी आज अपने इस तगड़े लंड से वैसी ही कर दो इसलिए में तुमसे चुदवाकर पता लगाना चाहती हूँ कि तुम कैसा चोदते हो? और फिर पूजा ने अपने कुल्हे पीछे करते हुए कहा, लेकिन मुझे लग रहा है कि जो मैंने सुना था तुम उससे भी कहीं बेहतर चोदते हो। अब में ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत में धक्के मार रहा था, वो भी पूरे जोश में अपने कुल्हे पीछे धकेलकर मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थी, संजय आह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है, हाँ और ज़ोर से चोदो फाड़ दो मेरी चूत को। अब में और भी ज़ोर से अपने लंड को उसकी चूत की जड़ तक डालकर तेज धक्के मार रहा था। दोस्तों देखकर मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूत इससे पहले भी कई बार चुद चुकी थी, लेकिन फिर भी गुलाबी थी और कुछ टाईट भी थी। अब उसको मेरा आठ इंच का लंड अंदर लेने में दर्द तो ज़्यादा नहीं हुआ था, लेकिन वो मेरा पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में ले रही थी, उसकी चूत बहुत टाईट और गरम भी थी। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, में उसकी स्कर्ट को एकदम ऊपर उठाकर उसके कूल्हों को कसकर अपने दोनों हाथों से पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहा था और अब वो रूको मत चोदते जाओ आह्ह्ह सस्स्सईईई ओह्ह्ह्ह संजय मेरा निकलने वाला है बोले जा रही थी और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रही थी।

फिर मैंने उसके पानी का स्पर्श अपने लंड के चारों तरफ महसूस किया, तभी मेरी नजर दरवाज़े पर खड़ी निशा पर पड़ी। अब निशा मेरे ऑफिस के बंद दरवाज़े पर खड़ी अपने एक हाथ में पूजा का लेटर और अपनी स्कर्ट पकड़े हुए थी और अपने दूसरे हाथ से वो अपनी खुली चूत में उंगली कर रही थी। दोस्तों में आप सभी को बता दूँ कि निशा को में हर दिन जब भी मौका मिलता उसकी चुदाई करता और वो हमेशा ऑफिस में बिना पेंटी के रहती है और घर जाते समय वो अपनी पेंटी पहनती है। फिर पूजा की नजर उस पर पड़ी, वो मुस्कुराने लगी और वो समझ गयी थी कि एक बॉस के कैबिन में अगर उसकी सेक्रेटरी अपनी चूत में उंगली कर रही है तो कोई मुसीबत नहीं आने वाली है। अब निशा समझ गयी थी कि मैंने उसको देख लिया है, इसलिए वो मुस्कुराते हुए हमारे करीब आई और हम लोगों को चुदाई करते हुए देखने लगी। अब भी मैंने पूजा को धक्के देकर चोदना चालू रखा था, निशा हम दोनों के करीब आई और अपने एक हाथ को पूजा की गांड पर रखकर बोली कि संजय इसकी गांड कितनी सुंदर और प्यारी है ना? फिर निशा ने अपना एक हाथ पूजा के खुले टॉप के अंदर डालकर उसके बूब्स को सहलाया और उसके निप्पल को मसल दिए। अब मैंने खुश होकर कहा कि हाँ यह बहुत सुंदर बूब्स है।

तभी निशा कहने लगी कि संजय पूजा बहुत सुंदर है, क्या इसकी चूत भी इसके बूब्स की तरह कसी हुई है? तब मैंने ज़ोर से एक धक्का मारते हुए कहा कि हाँ, बहुत ही टाईट चूत है इसकी। अब निशा बोली कि तुम्हें पता है आज में खाना खाने कहाँ गयी थी? अब में मन ही मन में सोचने लगा था कि यह क्या चुदाई के बीच में यह खाना का रोना लेकर बैठ गयी और में थोड़ा उखड़ते हुए बोला कि नहीं मुझे नहीं पता। फिर वो बोली कि में आज पैलेस पर गयी थी और अब में निशा को सुन रहा था और पूजा ने अपनी चूत को सिकोड़कर मेरे लंड को अपनी चूत की गिरफ़्त में ले लिया था। अब पूजा सिसकियाँ भरते हुए मेरे लंड के पानी को निचोड़ रही थी, उसने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर निशा के पैरों पर से रेंगते हुए उसकी चूत पर रख दिया था। तब निशा बोली कि ओह्ह्ह संजय देखो तो यह मेरी चूत से खेल रही है। अब पूजा अपनी दो उंगलियाँ निशा की चूत में डालकर अपने अंगूठे से उसकी चूत के दाने को सहला रही थी। फिर मैंने उसको पूछा कि हाँ तुम मुझे उस पैलेस के बारे में कुछ बता रही थी? तब निशा ने अपनी कमर को हिलाते हुए कहा कि इस समय तुम उस पैलेस को गोली मारो, जब हम इस काम से फ्री हो जाएँगे तब में तुम्हें बताऊँगी।

अब पूजा अपनी उंगलियों से निशा की चूत को चोद रही थी, जिसकी वजह से निशा की साँसे भी उखड़ने लगी थी। अब निशा ने अपने एक हाथ को आगे बढ़ाकर पूजा की चूत पर रख दिया और मेरा लंड पूजा की चूत में घुसते हुए निशा की उंगलियों से टकराता तो एक अजीब ही सनसनी मच जाती। अब वो पूजा की चूत को सहला रही थी, तभी पूजा बोली कि क्या तुम्हें मेरी चूत अच्छी लगी संजय? और फिर उसने ज़ोर से मेरे लंड को भीचते हुए अपना पानी मेरे लंड पर छोड़ दिया और फिर मैंने भी दो-तीन धक्के ज़ोर से मारकर अपना सारा पानी उसकी चूत में ही निकाल दिया। फिर मैंने अपना लंड पूजा की चूत से बाहर निकाला, मेरे लंड से छूकर पूजा की चूत का पानी जमीन पर टपक रहा था। अब जब पूजा ने सीधा होना चाहा, तब निशा ने उसको रोक दिया और फिर निशा ने उसके पीछे आकर अपनी दो उँगलियों को पूजा की चूत में डाल दिया। फिर थोड़ी देर तक अपनी उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर घुमाने के बाद मेरे और पूजा की क्रीम से लिपटी अपनी उंगलियाँ उसने पूजा को चूसने के लिए दी। अब पूजा ने बिना किसी झिझक के साथ अपने मुँह के अंदर तक लेकर उसकी उंगलियों को चूसा और चाटा। फिर निशा ने अपनी उंगलियाँ बाहर खीच ली और पूजा खड़ी होकर अपनी स्कर्ट को सीधा करने लगी थी।

फिर निशा पूजा की पेंटी जो जमीन पर पड़ी थी, उसको उठाकर सूंघने लगी और पूजा की तरफ देखकर आँख मारकर बोली कि तुम्हारी चूत की खुशबू सही में बड़ी मतवाली है और यह कहकर उसने पेंटी पूजा को पकड़ा दी। अब पूजा ने पेंटी पहनी और अपने कपड़े ठीक कर लिए, पूजा ने अपनी स्कर्ट और ब्लाउज को भी ठीक किया, लेकिन उसने अपने ब्लाउस के दो बटन खुले ही रहने दिए थे। फिर उसने डील का पेपर उठाया और मेरे सामने रख दिया, मैंने साईन करके उसको वो पेपर दे दिया। फिर उसने वो पेपर लेकर अपने ब्रीफकेस में रखकर उसको बंद किया और वो तुरंत खड़ी हो गयी और बोली कि तुम्हे बहुत बहुत धन्यवाद संजय, मुझे पूरी पूरी उम्मीद है कि हमारा यह रिश्ता आज के बाद और भी ज्यादा मजबूत होगा और यह बात कहकर वो वहाँ से चली गयी। अब निशा मेरी तरफ देखते हुए बोली कि कमाल की औरत है ऐसी औरतें कम ही देखने को मिलती है। फिर मैंने निशा की बात का जवाब देते हुए कहा कि हाँ तुम सही कह रही हो, क्योंकि इतना आत्मविश्वास किसी में कम ही होता है और पूजा उन औरतों में से एक है जो चाहा वो हर हाल में हासिल करती है। फिर निशा बोली कि में शुरू से ही तुम्हें देख रही थी, जब तुम पूजा को चोद रहे थे तब मुझसे रहा नहीं गया, में भी इस सुंदर औरत की चूत देखना चाहती थी और इसलिए में अंदर चली आई।

अब मैंने निशा से कहा कि कोई बात नहीं, अच्छा तुम उस पैलेस के बारे में कुछ बता रही थी? तब निशा बोली कि में वहाँ पर टेबल पर बैठकर सूप पी रही थी कि तभी एक बहुत ही सुंदर लड़की जिसका नाम चाँदनी था, वो मेरे पास आई और पूछा कि क्या वो वहाँ बैठ सकती है? वो बड़ी ही अजीब लड़की थी। अब हम लोग बातें ही कर रहे थे कि उसी दौरान उसने अपना हाथ मेरी जांघो पर रखा और मेरी चूत से खेलने लगी थी। तब मैंने उसको पूछा कि फिर क्या हुआ? फिर निशा अपनी चूत को खुजाते हुए बोली कि फिर उसने मुझसे औरतों वाले बाथरूम में चलने को कहा, वो इतनी सुंदर थी और साथ ही उसने मेरी चूत को सहला सहलाकर इतना गरम कर दिया था कि में अपने आपको रोक नहीं सकी। फिर में उसके पीछे वॉशरूम में चली गयी और फिर वहाँ पर उसने मेरी चूत को इतना कस कसकर चूसा और चाटा कि मेरी चूत ने दो बार अपना पानी छोड़ दिया। फिर मुझे देर हो रही थी, इसलिए में उसकी चूत का स्वाद नहीं चख सकी, लेकिन उम्म्म वो बड़ी ही दिलचस्प लड़की थी और फिर निशा वापस अपने कैबिन में जाने के लिए उठी और बोली कि वैसे संजय वो दोलतों & जॉनसन में काम करती है।

अब मैंने उसको अपनी कंपनी में काम करने के लिए मना लिया है, वो कल से मेरी असिस्टेंट के रूप में हमारी कंपनी में काम करने आ रही है, तुम चाहो तो कल सुबह उसका इंटरव्यू ले सकते हो। अब में भी उस लड़की की सुंदर चूत और बदन के विचारों में पूरी तरह से खो गया था। दोस्तों एक बात बताऊँ चाँदनी आई, लेकिन पूजा तो पूजा ही थी और उसके बाद तो मैंने पूजा को कई बार चोदा। अब उसको मेरे लंड से अलग अलग तरीके से चुदवाने में बहुत मज़ा आता है और अब हम दोनों चुदाई का भरपूर आनंद लेते है और बहुत मज़े भी करते है।

दोस्तों यह था मेरी सपनों की रानी के साथ वो बिताए सच्चे पल एक सच्ची चुदाई की घटना मुझे उम्मीद है कि सभी पढ़ने वालों को यह जरुर पसंद आएगी और अब मुझे जाने की आज्ञा दें ।।

धन्यवाद …

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