सगी बहन को चोदने का अनोखा सफर

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प्रेषक : सौरभ …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सौरभ है और में रायगढ़ राज्य छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ। में दिखने में बहुत अच्छा लगता हूँ और मेरी उम्र 29 में एक स्टील इंडस्ट्री में नौकरी करता हूँ। दोस्तों मुझे शुरू से ही सेक्सी कहानियाँ पढ़ने का बहुत शौक है। पहले में सेक्सी कहानियाँ किताबों में और अब कामुकता डॉट कॉम पर पढ़ता हूँ। मुझे सेक्स करना बचपन से ही बहुत अच्छा लगता था और आज में अपनी भी एक सच्ची घटना मेरा सेक्स अनुभव जो मेरी छोटी बहन के साथ हुई एक घटना आप लोगों को सुनाने जा रहा हूँ। उसकी उम्र 25 साल और वो अब अपनी एक शादीशुदा जिंदगी एक ग्रहणी बनकर बिता रही है। दोस्तों में अपनी बहन को बचपन से ही बहुत प्यार करता था, क्योंकि में उसमे एक बहुत ही अच्छा आकर्षण महसूस करता था और यह बात कुछ साल पहले शुरू हुई थी। उस समय में 18 साल का था और मेरी बहन मीता करीब 15 साल की एक कमसिन कुंवारी कच्ची कली थी और वो अभी अभी जवान हुई थी, लेकिन मीता के उभरे हुए बदन को देखकर उसकी उम्र उस समय 19 साल से कम नहीं लगती थी, क्योंकि उसका शरीर बहुत कसा हुआ और उसके एकदम गोल बूब्स बहुत अच्छे थे।

दोस्तों में हमेशा मीता के बदन को छूने की कोशिश किया करता था और मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आता था इसलिए में मस्ती में उससे बात करते करते उसके कूल्हों पर चपत लगा दिया करता था और कभी कभी में उसके बूब्स को जानबूझ कर छू लेता, लेकिन वास्तव में उस समय मुझे भी औरत और आदमी के उस रिश्ते के बारे में इतना मालूम नहीं था। बस मुझे तो अपने मन की ख़ुशी के लिए मीता का साथ और उसे छूना अच्छा लगता था। यह सभी ऐसे ही चलता रहा और उसके तीन साल बाद मुझे मेरे एक दोस्त ने कुछ गंदी किताबे पढ़ने और देखने के लिए दे दी। उनमें कहानियों के साथ साथ बहुत सारे नंगे फोटो देखकर मुझे बहुत अजीब सा कुछ हुआ और तभी मुझे उसके घर जाने जा मौका मिला। दोस्तों मेरा दोस्त पराग के पापा उस समय क्रषि विभाग में थे और वो एक अच्छे परिवार से था। उसने मुझे अपने घर में ऐसी बहुत सारी किताबें और भी दिखाईं और फिर वो अपने पूरे कपड़े उतारकर नंगा हो गया और में भी जोश में आकर अपने पूरे कपड़े उतारकर नंगा हो गया। उस दिन पराग ने मुझे सेक्स के बारे में बहुत कुछ बातें बताई और हम दोनों ने उस दिन बहुत मज़े किए। उस दिन से मेरा एक नई अलग दुनिया में प्रवेश हुआ और वो थी सेक्स की दुनिया। दोस्तों बुक्स में देखकर ही हमने सेक्स के बारे में जाना और मैंने पराग की गांड को जमकर चोदा और पराग ने मेरी गांड को चोदा।

फिर एक दिन अचानक पराग ने मुझसे पूछा कि क्या तेरी किसी लड़की को नंगी देखने की इच्छा नहीं होती? तो मैंने उससे कहा कि मेरी तो बहुत इच्छा होती है, लेकिन में कैसे देख सकता हूँ? तब वो मुझसे बोला कि कल तू सुबह 9:00 बजे मेरे घर पर आ जाना तब में तुझे नंगी लड़की दिखा दूँगा। में उसके मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश होकर उसके घर पर दूसरे दिन सुबह उसके बताए ठीक समय पर चला गया। तब तक उसके पापा ऑफिस जा चुके थे और उसकी मम्मी हर दिन की तरह उनकी पड़ोसन सरिता आंटी के यहाँ गपशप मारने अपना समय बिताने चली गई। अब घर में पराग और उसकी बड़ी बहन रानी दीदी ही थी। दोस्तों मेरे मन की बात पूछो तो में अब बहुत व्याकुल था उस नंगे जिस्म को देखने के लिए, जिसके लिए में पूरी रात बस उसी के सपने देखता रहा और अब जल्दी से पराग के रूम में जाकर मैंने उससे बोला कि वो नंगी लड़की देखने हमें कहाँ चलना है? चलो अब जल्दी चलो। तो पराग भी उस समय जोश में था और वो मुझसे बोला कि में तुझे अपना एक बहुत बड़ा सबसे छुपा हुआ राज बता रहा हूँ तू कभी किसी को यह बात बताना नहीं, में तुझे वो नंगी लड़की यहीं पर दिखा दूँगा। दोस्तों में अब उसके मुहं से वो बातें सुनकर बहुत आशचर्य में पड़ गया। में पहले से ही बहुत कुछ सोच रहा था अब उसके यह बात कहने के बाद मेरे मन में ना जाने क्या क्या चलने लगा था और मन ही मन सोचने लगा कि पराग मुझे अपने घर में नंगी लड़की कैसे दिखा देगा? वैसे मैंने देखा कि पराग भी उस समय कुछ नर्वस दिख रहा था और वो बार बार रूम से बाहर जा रहा था। फिर कुछ देर बाद वो मुझे अपने रूम से बाहर बिल्कुल चुपचाप लेकर आ गया और वो धीरे से मुझे किचन के ऊपर बने स्टोर में ले गया उसने मुझे पहले से ही हिदायत दे रखी थी कि में अपनी तरफ से कोई भी आवाज़ ना होने दूँ। अब मैंने देखा कि उस स्टोर की ऊंचाई बहुत कम थी और उसमे कमर को झुकाकर चलना पड़ रहा था और स्टोर में थोड़ा अँधेरा भी था और बहुत सारा सामान भी भरा हुआ था, लेकिन एक तरफ रास्ता साफ था। कहीं नीचे से लाइट की हल्की रोशनी आ रही थी और हम दोनों वहीं पर ठहर गए।

फिर मैंने गौर से देखा कि वहाँ पर एक जाली लगी हुई थी और एक छेद से पाईप नीचे की तरफ गया हुआ था वहाँ पर पाईप से भी बड़े आकार का एक छेद था और पहले पराग ने वहां से नीचे कुछ देखा। फिर उसने मुझे भी इशारे से अपने पास बुलाकर नीचे देखने को कहा दोस्तों नीचे देखते ही मेरी हवा एकदम टाईट हो गयी, क्योंकि नीचे पराग के घर का पूरा बाथरूम दिखाई दे रहा था और वहाँ पर पराग की बड़ी बहन रानी दीदी एकदम नंगी होकर नीचे बैठकर अपने कपड़े धो रही थी। बाथरूम में पूरी तरह से बहुत उजाला था और रानी दीदी का पूरा गोरा चिकना जिस्म मुझे दिखाई पड़ रहा था। तो उनका एकदम सेक्सी नंगा जिस्म देखते ही मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया और रानी दीदी के वो गोल गोल बूब्स कपड़े धोते समय बहुत ज्यादा हिल रहे थे और उनके दोनों पैरों के बीच में वो झाटों का एक गुबार दिख रहा था। दोस्तों में आज पहली बार किसी नंगी लड़की को अपनी आखों से देखा था इसलिए मेरा लंड एकदम खड़ा हो चुका था और पराग की भी हालत अब ठीक मेरी तरफ बहुत खराब थी और अब उसने अपना लंड बाहर निकालकर सहलाना शुरू कर दिया था और मैंने भी अपना लंड बाहर निकालकर रगड़ना शुरू कर दिया।

फिर कुछ देर बाद रानी दीदी अपने पूरे कपड़े धोने के बाद खड़ी हो गयी और वो पानी चालू करके नहाने लगी। दोस्तों देखने पर ऊपर से उनके गोरे बदन पर लटके हुए बूब्स जिनके उपर वो हल्के भूरे रंग के निप्पल बहुत कामुक दिख रहे थे और खड़े होने की वजह से उनके सेक्सी बदन को देखना मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था और उनकी वो नंगी गोरी हिलती हुई गांड को देखकर तो मैंने अपना कंट्रोल बिल्कुल ही खो दिया। अब मैंने देखा कि रानी दीदी अपने गीले बदन पर साबुन लगाकर अच्छी तरह से मसल मसलकर नहाने लगी थी और उन्होंने अपनी चूत को भी बहुत बार पानी डाल डालकर बहुत अच्छी तरह से धोया और अब में ज़ोर ज़ोर से अपने लंड पर हाथ चलाने लगा था और पराग भी अपना लंड लगातार हिलाने लगा और उसने अपनी दीदी को देख देखकर अपने लंड का सारा माल वहीं जमीन पर झाड़ दिया। फिर कुछ देर बाद बाथरूम में रानी दीदी के नहाने के बाद जब वो अपने कपड़े पहनने लगी तो हम दोनों जल्दी से उस स्टोर रूम से नीचे उतर गये और अब मैंने नीचे आकर पराग की बहुत तारीफ कि क्योंकि उसने मुझे अपनी रानी दीदी का नंगा जिस्म दिखाया और हम दोनों ने ऊपर बहुत मजे किए। तभी पराग ने मुझे बताया कि वो अपनी दीदी को हर रोज ऐसे ही नंगा नहाते हुए देखता है और उसी ने ऊपर का वो छेद इतना बड़ा कर दिया था जिससे कि वो बहुत आसानी से अपनी रानी दीदी को नहाते हुए देख सके।

फिर उस दिन से में रोज पराग के यहाँ पर ठीक उसकी समय पर जाता और रानी दीदी को नंगी देखकर मुठ मारता था। दोस्तों मैंने अपने दोस्त के साथ मिलकर ऐसा बहुत बार किया, लेकिन उसी समय पराग के पापा का तबादला जगदलपुर हो गया और उसके एक महीने के बाद वो लोग यहाँ से चले गये। अब उनके इस तरह अचानक से चले जाने की वजह से मेरा उसकी रानी दीदी को नहाते हुए देखना और मुठ मारना सब बंद हो गया था, लेकिन अब मुझे सेक्स का चस्का सा लग चुका था, जिसकी वजह से अब में रात को सोते समय रानी दीदी और पराग को याद करके मुठ मारता और फिर ना जाने कब थककर सो जाता। तभी उन दिनों में मेरी बहन मीता की तरफ मेरा झुकाव और भी ज़्यादा बढ़ गया था में उसकी तरफ ज्यादा आकर्षित होने लगा थ और तब तक मीता भी अब 18 साल से ज्यादा और बला की सुंदर हो चुकी थी। अब मैंने मीता की तरफ ध्यान से देखना शुरू किया। मीता रानी दीदी के मुकाबले कहीं ज़्यादा सुंदर है उसका वो एकदम मलाई जैसी चिकना बदन और पूरी गोरी चमड़ी कयामत ढा रही थी। मीता के बूब्स तो एकदम बाहर की तरफ निकलते जा रहे थे और मैंने अब मन ही मन सोचा कि पराग ने तो अपनी बड़ी बहन को नंगा देखकर मुझे भी दिखाया और हमने बहुत मज़ा लिया तो क्यों ना में भी अपनी छोटी बहन मीता को नंगी देख सकता और फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि क्यों ना प्लान बनाकर मीता को भी नंगा देखा जाए और अगर उसको चोदने का मौका मिल जाए तो मुझे बहुत ही मज़ा आ जाएगा।

फिर यह बात सोचकर अब मैंने मीता के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय गुजारना शुरू कर दिया था और अब में हर कभी मज़ाक में उसकी गांड में चिकोटी करता तो कभी बूब्स के उभार को छूकर अपने मन को खुश किया करता था, लेकिन वो मुझसे कुछ भी नहीं कहती थी। हम दोनों पढ़ाई साथ में करते थे और वो मेरे पास में बैठकर मुझसे सवाल पूछती रहती थी और में मौका देखकर उसके बदन पर हाथ घुमा देता था और उसे अपने से सटाने की कोशिश करता था। हम दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती थी, लेकिन फिर भी में खुलकर उसको चोदने की बात कहने की हिम्मत नहीं रखता था, क्योंकि मुझे बहुत डर लगता था। एक दिन रात को में बहुत गरम हो गया और में अपने बेड से उतरकर मीता के बेड की तरफ चला गया। मीता मेरे बेड से कुछ दूर दूसरे बेड पर सो रही थी और में मीता के बेड के पास जाकर बैठ गया और फिर मैंने अपनी अंडरवियर को उतार दिया। अब मेरी प्यारी बहना एकदम शांत होकर गहरी नींद में सो रही थी और उस समय मेरी आँखो में काम वासना का सुरूर चड़ा हुआ था।

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फिर मैंने मच्छर जाली को उठाकर अपने आप को मीता के बेड के अंदर कर लिया और अपने हाथ से मीता की स्कर्ट को घुटने से ऊपर ले लिया। अब मीता की काली कलर की पेंटी मुझे साफ साफ नज़र आ रही थी और मैंने अपने काँपते हुए हाथों से उसकी उभरी हुई चूत को पेंटी के ऊपर से छुकर महसूस किया। में उस समय पूरे जोश में था और मेरा लंड पूरे जोश में आकर फड़फड़ा रहा था। मैंने मीता की पेंटी को हटाकर चूत को छूना चाहा, लेकिन उसी समय अचानक से मीता की वो गहरी नींद खुल गयी और वो अपनी आखों को खोलकर मुझे देखने लगी। ठीक इसी समय मेरे लंड ने भी अपना सारा पानी झाड़ दिया और तभी मेरा सारा तनाव ख़त्म हो गया। अब मुझे मन ही मन में कुछ अजीब सा महसूस होने लगा था मैंने अपनी अंडरवियर हाथ में उठाई और अपने गीले लंड को लेकर में अपने बेड पर आकर सो गया, मुझे पता नहीं मीता ने मेरे बारे में क्या सोचा होगा, लेकिन उस दिन से में मीता से नज़र नहीं मिला पा रहा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर धीरे धीरे हम दोनों का रिश्ता पहले जैसा होने लगा था और मेरा मीता के साथ चुदाई करने का वो अधूरा सपना मुझे फिर से दिखाई देने लगा था। कभी कभी मुझे ऐसा लगता था कि मीता खुद भी मुझे अपनी स्कर्ट के नीचे दिखाने की कोशिश किया करती है। अब तो मेरा मीता के बूब्स को और उसकी गांड को घूरकर देखने का शौक सा हो गया था और में अधिकतर समय मीता को याद करके मुठ मारा करता था और मेरी बहुत इच्छा थी कि में मीता की चुदाई करूँ, लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा था। फिर में कुछ दिनों के बाद एक कॉलेज में अपना दाखिला हो जाने के कारण अपने शहर से बाहर नागपुर चला गया। नागपुर में बिल्कुल टाइट जींस और टॉप पहने लड़कियों को मैंने बहुत देखा, लेकिन फिर भी मीता की याद मेरे मन से कम नहीं हुई और में जब भी मीता की फोटो सामने रखकर लंड हिलाता तो मुझे मज़ा आता था। जब में अपने कॉलेज के आखरी साल में था तो मीता की शादी राहुल जीजाजी से ग्वालियर में हो गयी और मीता अपने घर चली गई और मीता की शादी के एक साल बाद मेरी भी शादी एक सुंदर दिखने वाली मुदिता नाम की लड़की से हो गयी। वैसे मुदिता बहुत सीधी साधी लड़की थी और उसे सेक्स के बारे में बहुत कम मालूम था। फिर भी मैंने उसे बहुत कुछ सिखा दिया और मेरी सेक्स लाइफ मुदिता के साथ शुरू हो गई। मुदिता के साथ सेक्स करने में मुझे तभी परम आनंद आता था जब में मीता के बारे में उसके गोरे सेक्सी बदन के बारे में सोचता था और में मुदिता की चुदाई करता था, लेकिन मेरे से मन में मीता को याद करता रहता था और मीता अब भी मेरी सपनो की रानी थी और एक महीने में कम से भी कम में एक बार मीता के फोटो को अपने सामने रखकर मुठ ज़रूर मारता था।

फिर एक बार में मीता को सर्दियों की छुट्टियों में लेने के लिए उसके ससुराल चला गया और में उसे अपने साथ लेकर ट्रेन से रायगढ़ के लिए बैठा। ट्रेन में उस समय हम दोनों को एक बर्थ मिली थी, क्योंकि उस समय बहुत भीड़ चल रही थी। फिर हम दोनों ने खाना खाया और फिर मैंने मीता का बेड ऊपर बर्थ में बिछा दिया। ट्रेन में उस समय बहुत सर्दी थी इसलिए में भी बर्थ के एक किनारे पर बैठ गया और मैंने मीता को रज़ाई से ढक दिया, बाहर सर्दी ज़्यादा ही थी और मीता ने देखा कि मुझे सर्दी महसूस हो रही है तो वो मुझसे बोली कि भैया आप भी आ जाओ इसी रज़ाई में सो जाओ और फिर मैंने मीता की बात को मान लिया और अब में मीता के पैरों की तरफ अपना सर रखकर उस रज़ाई के अंदर घुस गया। अब में लेटे हुए उसी के बारे में सोचने लगा और उस स्लीपर क्लास की छोटी सी बर्थ में हम दोनों एक ही रज़ाई में घुसते ही हमारा शरीर एक दूसरे के शरीर से छूने लगा था। वैसे अब तक मीता को भी राहुल जीजाजी से चुदाई का बहुत अच्छा अनुभव हो चुका था और मुझे भी मुदिता को चोदकर बहुत कुछ सीखने को मिल गया था। मीता का वो गदराया हुआ गरम जिस्म मुझसे टकराते ही मेरा जिस्म ज्यादा गरम हो गया और तुरंत ही मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया और अब मेरा लंड मेरे ट्राउज़र से बाहर निकलने को बहुत बेताब होने लगा था और मेरी सपनो की रानी मेरी वो बहाना मुझसे बिल्कुल चिपककर लेटी हुई थी।

फिर मैंने मीता के पैर को उसकी साड़ी के ऊपर से छूना शुरू किया और मीता की तरफ अपनी करवट को कर लिया। इस तरह में मेरा पैर मीता के बूब्स को छूने लगा था। अब मेरी यह हालत हो रही थी कि में मीता की जाँघ को दबाकर उसके पैरों को चूमना चाह रहा था और मैंने सोचा कि यह सबसे अच्छा मौका है मीता की चुदाई करने का और में उसकी चुदाई करने के बारे में सोचने लगा। तभी अचानक से मैंने महसूस किया कि मीता मेरे पैरों को सहला रही है और मीता का यह मुझे एक इशारा था या कुछ और लेकिन मैंने तुरंत ही मीता की साड़ी को उसके घुटने तक सरका दिया और अब में उसके चिकने पैर को सहलाने लगा और अपने होंठो से चूमने लगा। तभी तुरंत ही मीता ने भी अपनी तरफ से जवाब दिया और उसने मेरे पैर को सहलाते हुए मेरी पेंट के ऊपर से लंड को पकड़ लिया, तो में तुरंत समझ गया कि मेरी बहन को भी सेक्स की भूख महसूस हो रही है, शायद जीजाजी ने मेरी बहन को अच्छी तरह से अनुभवी कर दिया था। अब मैंने अपनी बहन के मखमली पैर पर हाथ फिसलाते हुए उसकी गांड को पकड़ लिया और पेंटी में हाथ डालकर उसकी चूत को पकड़ लिया। दोस्तों मेरा हाथ चूत पर लगते ही मीता एकदम पागल सी हो गयी और उसने भी अपने एक हाथ से जिप को खोलकर अंडरवियर से मेरा लंड बाहर निकाल लिया और अब वो मेरे लंड को सहलाने लगी। मुझे बहुत मज़ा आने लगा था और मीता एक अनुभवी चुदक्कड़ औरत की तरह मेरे लंड को सहला रही थी। फिर मैंने भी मीता की चूत को अपनी एक ऊँगली से चोदना शुरू कर दिया था और हम दोनों अब अपने पूरे उफान पर थे और दिल लगाकर एक दूसरे की चुदाई की आग को शांत कर रहे थे। हम दोनों ने अपनी स्पीड को तेज कर दिया था और कुछ ही देर में मेरे लंड ने और मीता की चूत ने अपना अपना पानी छोड़ दिया। फिर मीता ने कसकर मेरे लंड को अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया और वो मेरे पैर पर किस करने लगी। फिर आख़िरकार मैंने अपनी मंज़िल पा ही ली थी।

फिर दूसरे दिन जब हम रायगढ़ पहुँचे तो मीता बहुत खुश दिखाई दे रही थी और घर पहुंचने के बाद मीता ने मुझे बताया कि वो पहले से ही बहुत अच्छी तरह से जानती थी कि में उसे चोदना चाहता था और उसने कहा कि जब हम दोनों एक दूसरे की मर्जी जान चुके हैं तो में जल्द ही तुम्हारे लंड से अपनी चूत को चुदवाना चाहती हूँ। दोस्तों मीता के मुहं से ऐसे पूरे खुले शब्द वो बात सुनकर में बहुत हैरान हो गया था और तब मीता ने मुझे बताया कि राहुल उसे रोज अच्छी तरह से चोदता है और उसी ने मुझे यह सब बोलना सिखाया है वो मुझे लंड की रानी कहकर बुलाता है और बहुत ही खुले विचारों का है। अब मैंने अपने खुले विचारों वाले जीजाजी को मन ही मन धन्यवाद कहा, जिसकी वजह से मुझे अपनी बहन को चोदने का मौका मिल रहा है।

दोस्तों हमारे घर में दो दरवाजे है जिससे घर में अंदर आ सकते है। सामने वाला दरवाजा हमेशा खुला रहता है और पीछे वाला दरवाजा अंदर से हमेशा बंद रहता है। पीछे वाले दरवाजे के पास ही मीता का रूम है और बाकी सभी कमरे पहली मंजिल पर है। अब में अपनी प्लान के अनुसार दूसरे दिन दोपहर को करीब दो बजे पीछे वाले दरवाजे से घर में आ गया और मैंने मीता के रूम में जाकर मीता को तुरंत अपनी बाहों में भर लिया। आज मेरी बचपन की वो अधूरी इच्छा पूरी होने वाली थी। मैंने जी भरकर अपनी बहन को चूमने चाटने के बाद जल्दी से उसको पूरा नंगा कर दिया था और मेरी बहन नंगी होकर क़यामत ढा रही थी। उसके गोल गोल भरपूर बूब्स को देखकर में एकदम पागल हो गया और एक बूब्स को में अपने हाथ से मसलने लगा और दूसरे को चूसने लगा, जिसकी वजह से मीता का जोश अब ज्यादा बढ़ने लगा था और उसने भी मेरे कपड़े उतारकर मुझे नंगा कर दिया। अब मीता ने मेरे लंड को अपने एक हाथ से सहलाना शुरू कर दिया और वो मेरी गांड को भी छूने लगी और मेरा लंड बार बार हल्के से झटके मार रहा था और एक ज़बरदस्त किस्म की चुदाई मुझसे बार बार माँग रहा था।

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अब मैंने उसकी टाइट और मदमस्त कामुक चूत की तरफ बहुत प्यार से देखा और मीता तुरंत मेरा इशारा समझ गयी और वो मुझसे बोली कि भैया जल्दी से मुझे चोदो ना। मुझसे अब ज्यादा रुका नहीं जाएगा प्लीज जल्दी से अपना लंड घुसा दो मेरी इस तड़पती हुई प्यासी चूत में और मुझे आज आप वो मज़ा दो जो पिछले बहुत सालों से देना चाहते हो। अब में उसके बूब्स को चूस रहा था और वो सेक्सी आवाजें निकाल रही थी। मैंने तभी उसकी गरम चूत पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया और अपनी एक उंगली को उसकी चूत में अचानक से घुसेड़ दिया, जिससे वो मज़े में तड़पने लगी और में अब आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगली को उसकी चूत के अंदर बाहर करता रहा। फिर मैंने उसे ज़मीन पर रखे गद्दे पर लेटा दिया और उसके पैरों को फैलाकर थोड़ा सा अपने 6 इंच लंबे और 2.5 इंच मोटे लंड को अंदर घुसाकर एक ही जोरदार झटके से उसकी चूत में अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया। गीली चूत होने की वजह से लंड फिसलता हुआ अंदर जा पहुंचा। तो वो उउफफफ्फ़ आईईईई सस्स्स्सीईईईई माँ में मर गयी आह्ह्ह्हह्ह मेरे प्यारे भैया तुम कितने अच्छे हो जो अपनी बहन को चोद रहे हो, प्लीज़ भैया अच्छी तरह से चोदो मुझे हाँ और ज़ोर से धक्के दो डाल दो पूरा अंदर उफ्फ्फ्फ़ वाह मज़ा आ गया।

दोस्तों मैंने अब मीता की पीठ को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर उसकी चुदाई करने लगा था। मीता को अब हल्के दर्द के साथ साथ मज़ा भी बहुत आ रहा था और वो सिसकियां और चीख के साथ साथ अपनी गांड को उठा रही थी। मुझे उसकी मस्त चूत पर धक्के लगाने का बहुत मज़ा आ रहा था और मैंने उसके कंधों को बहुत मज़बूती से पकड़ा हुआ था और वो आज पहली बार पूरी तरह मेरी पकड़ में थी। में अपना लंड बाहर निकलता और फिर एक झटके से सारा अंदर डाल देता। वो फिर से चीख पड़ी ओइईईहहह सस्स्स्सस्स उफ्फ्फ्फ़ प्लीज थोड़ा धीरे धीरे करो भैया मुझे बहुत दर्द होता है, लेकिन मैंने उसकी एक भी बात ना सुनी और में लागातार उसकी चूत पर लंबे लंबे धक्के देकर उसको चोदता रहा मेरा हर एक झटका उसके लिए मज़ा और दर्द भी ला रहा था।

अब मैंने मीता के नरम गुलाबी होंठो पर किस करना शुरू कर दिया और जमकर धक्के देकर उसको चोदने लगा, लेकिन अब में झड़ने को था और वो भी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी। फिर मैंने एक झटके से लंड को बाहर निकाला और फिर से ज़ोर से अंदर डाल दिया। मेरा लंड सीधा उसकी बच्चेदानी से जा टकराया और तभी मैंने अपना वीर्य उसकी चूत के अंदर डाल दिया और मीता ने खुश होकर मुझे अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया और मैंने भी मीता को जकड़ लिया। वो अब लंबी लंबी सांसे ले रही थी और उसका पूरा बदन पसीने से भीगा हुआ था और उसकी दोनों आखें बंद थी और मदहोशी का यह आलम बहुत अच्छा लग रहा था। फिर कुछ देर बाद हम दोनों उठे और अपने को कपड़े से साफ करने लगे। दोस्तों उस दिन के बाद से मैंने पांच बार और मीता की जमकर चुदाई के मज़े लिए, जो कि मेरी जिंदगी के सबसे हसीन पल रहे और मीता अब वापस अपने ससुराल चली गयी है और में उसे एक बार फिर से चोदने के लिए बहुत बेताब हूँ और में उसकी वैसी ही चुदाई दोबारा करना चाहता हूँ। में आने वाली सर्दियों में ग्वालियर जाने का प्लान बना रहा हूँ। अगर ऐसा हुआ तो उसकी वहां पर भी कोई अच्छा मौका देखकर चुदाई पक्की और में उसको चोदकर अपनी पुरानी यादे जरुर ताजा करूंगा और उसको बहुत मज़े लेकर चोदूंगा ।।

धन्यवाद …

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