मामी की चूत से लोड़े का पहला मिलन

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प्रेषक : बोबी …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम बोबी है और मेरी उम्र 27 साल है और में अमृतसर पंजाब का रहने वाला हूँ। में एक कॉलेज में अपनी तीसरे साल की पढ़ाई कर रहा हूँ। दोस्तों में आज आप सभी कामुकता डॉट कॉम के पढ़ने वालों के लिए अपनी ही एक सच्ची घटना लेकर आया हूँ और वैसे में भी आप सभी की तरह सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेता हूँ। मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आता है। फिर एक बार मेरे भी मन में अपनी इस कहानी को लिखकर आप तक पहुँचाने का विचार आ गया और मैंने उसको लिखना शुरू किया। यह कहानी मेरी और मेरी मामी के बीच हुई उस पहली मज़ेदार चुदाई की घटना है, जिसमे मैंने उसको अपनी चुदाई से पूरी तरह से खुश करके संतुष्ट किया और उन्होंने मेरा पूरा पूरा साथ दिया और अब आप सभी को ज्यादा बोर ना करते हुए में सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों यह बात आज से करीब तीन महीने पुरानी है जब में अपने नाना, नानी के घर पर अपनी छुट्टियाँ बिताने गया हुआ था। वहां पर मेरे मामा मामी रहते है। दोस्तों मेरी मामी दिखने के साथ साथ स्वभाव की भी बहुत अच्छी है और उनका व्यहवार घर के अलावा बाहर के लोगों के साथ भी बहुत अच्छा था और वो सभी के लिए बहुत अच्छी थी। वो मुझसे भी हमेशा बहुत हंस हंसकर बातें मजाक किया करती थी और कभी भी वो मेरी किसी भी बात का बुरा नहीं मानती थी। इसलिए धीरे धीरे मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ने लगी थी और वैसे भी वो हमेशा बड़े गले का कुर्ता पहना करती थी। उसके ऊपर जब भी वो घर में होती तो अपनी चुन्नी को गले में ही डाले रहती, जो हर कभी इधर उधर सरक जाती और बड़े गले से उनके उस कुर्ते से गोरे गोलमटोल बूब्स मुझे बाहर उभरे हुए नजर आते थे और उनको देखकर में मन ही मन बड़ा खुश हो जाता, इसलिए उनके बूब्स को देखकर मेरा मन हमेशा डोल जाता था और हमेशा मुझे देखकर ऐसा लगता था कि जैसे वो मुझे अपनी तरफ आकर्षित किया करती थी।

फिर में भी बार बार उनके किसी काम की वजह से नीचे झुकने का इंतज़ार किया करता था और मेरी नजर हमेशा उन्ही के ऊपर टिकी रहती थी। में उनको देखकर मज़े लेकर मन ही मन बहुत खुश हुआ करता था और मेरी उस हॉट सेक्सी मामी का नाम सोनिया है। दोस्तों मुझे जब भी लगता था कि वो अब नीचे झुकने वाली है तब में जानबूझ कर अपनी मामी के सामने जाकर खड़ा हो जाता था और फिर उसके बाद में अपनी तिरछी नज़र से उनके बड़े आकार के गोरे चिकने एकदम गोलमटोल बूब्स को अपनी चकित नजर से देखा करता था, क्योंकि मुझे उनके बूब्स बहुत पसंद थे और मुझे उन्हे छूने का हमेशा बहुत मन करता था। कभी कभी जानबूझ कर में उनसे सामने से जाकर टकरा जाता था और उसके बाद में बड़ी ही होशियारी से उनके बूब्स को छू लिया करता था। फिर मेरी इन हरकतों का उनको कभी भी बुरा नहीं लगता था, इसलिए में अपनी मन मर्जी का काम किया, लेकिन इतना सब करने से भी मेरा मन नहीं भरता था और अब में उनके दोनों बूब्स को अपने हाथ से सहलाना और उनको बारी बारी से दबाना चाहता था। वो रंग में बहुत गोरी सुंदर दिखने में बड़ी ही आकर्षक लगती है, इसलिए हर बार उनको देखकर मुझे उनकी चुदाई करने का मन किया करता था और वो बहुत ही मस्त गदराए हुए बदन की है और में भी वैसा ही सेक्सी बदन पसंद करता हूँ।

फिर एक दिन मेरे मामा उनके कुछ काम की वजह से करीब पांच दिनों के लिए दुबई जाना पड़ा और में उस समय घर के हॉल में बैठा हुआ ही था कि तभी मेरी मामी भी हॉल में आ गई और तब उन्होंने मुझे एक चिठ्ठी दे दी और उसके बाद वो अपने कमरे में चली गई। फिर मैंने उसको खोलकर पढ़ना शुरू किया तो मुझे उसको पढ़कर बड़ा आश्चर्य हुआ और में वो सब पढ़कर एकदम चकित था, क्योंकि उसमे लिखा हुआ था कि में तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ और मुझे तुम्हे देखते ही कुछ कुछ होता है, में तुम्हारे साथ अकेले में कुछ समय गुजारना चाहती हूँ और यह सभी बातें मैंने इस चिठ्ठी में इसलिए लिखकर तुमसे कही है, क्योंकि मुझे तुमसे यह बातें करते हुए बहुत शरम आ रही थी और अगर तुम मुझसे मिलना चाहते हो तो आज रात को तुम करीब 11.00 बजे मेरे कमरे में आ जाना में तुम्हारा इंतजार करूंगी और तुम्हारी तरफ से हाँ है तो तुम इस चिठ्ठी को मुझे वापस लौटा देना में तुम्हारा मतलब समझ जाउंगी।

दोस्तों यह सभी पढ़कर तो मेरा मन ख़ुशी से एकदम उछल पड़ा, क्योंकि जो सब कुछ में उनके साथ इतने दिनों से करना चाहता था, आज वो सब मुझे उनकी मर्जी से करने का मौका मिल रहा था और मैंने तुरंत खुश होकर वो चिठ्ठी जाकर उनको वापस लौटा दी और अब में बड़ी बेसब्री से 11 बजने का इंतज़ार करने लगा था। दोस्तों उस दिन मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था और कुछ घंटो का इंतजार करने के बाद अब रात हो चुकी थी और रात के 11 बज रहे थे। में ठीक उसी समय उठकर अपनी मामी के कमरे में चला गया और कमरे के अंदर जाते ही मैंने देखा कि मेरी मामी उस समय काले रंग की मेक्सी पहने हुए थी और उन्हे देखकर मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे उन्होंने अपनी उस मेक्सी के अंदर कुछ भी नहीं पहना था, इसलिए मुझे उनके वो बड़े आकार के बूब्स और उनकी उठी हुई निप्पल साफ साफ नजर आ रहे थे, जिसको देखकर में बड़ा चकित था। दोस्तों मुझे अब बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि में शुरुआत कहाँ से और कैसे करूं और तभी अचानक से मेरी मामी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और यह उस हसीन रात की शुरुआत थी जिसका मुझे बहुत दिनों से इंतजार था। अब मैंने भी थोड़ी सी हिम्मत करके अपनी मामी की कमर को पकड़कर उनको अपनी तरफ खींच लिया और अब में उनको चूमने लगा। फिर उसके बाद में उनके गालों को चूमते चूमते उनके हाथों तक पहुंच गया और जब मैंने ध्यान से देखा कि मेरी मामी भी अब मेरे उन चुम्मो का पूरा पूरा आनंद मज़ा ले रही है तो मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके अपने हाथ को उनके बूब्स पर रख दिया और मेरे हाथों ने जैसे ही उनके निप्पल को छुआ तो वो एकदम से कांप सी गयी। अब मुझे उनके बूब्स को छूकर महसूस करने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो दोनों बूब्स बहुत नरम मुलायम थे। वो सब मेरा पहला अनुभव था इसलिए में मन ही मन ख़ुशी से पागल हुआ जा रहा था और उस वजह से मेरे लंड ने भी अब धीरे धीरे अपना आकार बदलना शुरू कर दिया था। तभी मैंने उनकी मेक्सी को उनके दोनों कंधे से नीचे उतारकर सरका दिया, जिसकी वजह से अब उनके वो चिकने गोरे बूब्स पूरी तरह से बाहर आकर मेरे हाथ में थे। मैंने अपनी उँगलियों से उनके गुलाबी निप्पल को दबाना और उनको हल्के हल्के से रगड़ना शुरू किया तो वो उस वजह से बहुत उत्सुक हो गयी और उनके मुहं से अब आह्ह्ह्ह उफफ्फ्फ्फ़ स्सीईईइ की आवाजें आने लगी थी और फिर उन्होंने भी मेरी पेंट की चेन को खोलकर लंड को बाहर निकालकर उसको कसकर अपनी मुठ्ठी में जकड़ लिया था। अब में अपना चेहरा उनके बूब्स के पास ले गया और में अपने गालों और जीभ से उनके निप्पल को सहलाने लगा। फिर उसके बाद मैंने अपने एक हाथ से उनके बूब्स को पकड़ लिया और में उसको दबाने निप्पल को मसलने लगा था। फिर मेरे ऐसा करते ही मेरी मामी एकदम पागल सी हो गयी और उन्होंने जोश में आकर मेरे लंड को और भी ज्यादा कसकर पकड़ लिया और वो उसको धीरे धीरे सहलाने लगी। अब मैंने अपनी पेंट को खोलकर अपने लंड को पूरा बाहर निकालकर उनके हाथ में दे दिया और अब मेरी मामी बहुत अच्छी तरह से मेरे लंड को सहला रही थी। फिर तभी मैंने उन्हे पलंग पर बैठा दिया और में उनके सामने आकर खड़ा हो गया।

अब वो तुरंत समझ गयी कि में अब उनसे क्या करना चाहता था? में चाहता था कि वो मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर उसको चूसे और मेरे मन की बात को सुनकर समझकर उसी समय उन्होंने मेरे लंड को कसकर पकड़ा और फिर वो उसको चूमने लगी। मैंने अब उन्हे अपने लंड को पूरा अपने मुहं में लेने के लिए कहा तो उन्होंने मेरे लंड के आगे वाले हिस्से को जिसको हम सभी लंड का टोपा कहते है उसको मामी ने अपने मुहं में ले लिया और उसके बाद वो बड़े मज़े से उसके ऊपर अपनी जीभ को घुमाकर लोलीपॉप की तरफ मज़े से चूसने चाटने लगी थी, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन में अब और भी ज्यादा मज़ा लेना चाहता था इसलिए मैंने अपनी मामी के सर को पकड़ा और उसके बाद में अपने लंड को उनके मुहं में धक्का देकर उसको और भी ज्यादा अंदर डालता चला गया और देखते ही देखते मेरा पूरा का पूरा लंड उनके मुहं के अंदर था, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगने लगा कि कहीं मेरा वीर्य उनके मुहं में ही ना गिर जाए इसलिए मैंने उसी समय अपने लंड को उनके मुहं से बाहर निकाल लिया, लेकिन उसके बाद पता नहीं मामी को क्या हुआ मामी ने एक बार फिर से मेरा लंड जबरदस्ती अपने मुहं में लेकर चूसना शुरू कर दिया और मेरा लंड उनके लिए कोई चूसने की चीज सा हो गया था और वो बड़े मज़े से किसी अनुभवी रंडी की तरह मेरे लंड को चूस रही थी। अब में जोश में उनके सामने आकर पूरा नंगा हो गया और उसके बाद मैंने अपनी मामी की मेक्सी को भी पूरा उतार दिया और तब उनका वो पूरा नंगा गोरा चिकना जिस्म देखकर मेरा लंड पूरा सनसना उठा और वो हल्के हल्के झटके देने लगा था और अब मेरे लंड को कुछ चाहिए था तो वो थी मेरी मामी की वो चिकनी गीली कामुक चूत जिसके अंदर जाकर वो मज़े मस्ती करके अपने आपको शांत करना चाहता था।

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अब मैंने मामी को बिस्तर पर लेटा दिया और उसके बाद में तुरंत उनके ऊपर चड़ गया और उसके बाद में अपने लंड को अपने एक हाथ में लेकर उनकी चूत के दाने को सहलाने लगा, जिसकी वजह से वो सिसकियाँ लेने लगी और फिर थोड़ी देर के बाद मैंने जैसे ही अपना लंड उनकी चूत में डाला तो मेरी मामी के मुहं से वो आवाज़ निकली अओउूचह आह्ह्ह्ह स्सीईईईइ तब मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे मामा ने उनको कभी ठीक तरह से चोदा ही नहीं था। उस समय मैंने अपने लंड पर कंडोम भी नहीं लगाया था। अब मैंने अपनी मामी को कसकर पकड़ लिया और फिर में पूरा ज़ोर लगाकर अपने लंड को उनकी चूत के अंदर धक्का देकर डालता चला गया। तब मेरी मामी उस असहनीए दर्द से सिमट सी गयी और उन्होंने दर्द की वजह से अपने दोनों हाथों से मेरी जांघो को कसकर पकड़कर उस पर अपने नाखूनों को चुभा दिया और साथ ही साथ वो अपने दोनों पैरों को भींचने लगी और में हल्के हल्के धक्के देता रहा और तभी थोड़ी देर के बाद उन्हे भी मेरे धक्को से बड़ा मज़ा आने लगा था और फिर मैंने जब उनको धक्के देकर चोदते हुए अपनी मामी के चेहरे की तरफ देखा तो वो उस समय अपनी दोनों आखें बंद करके मुस्कुरा रही थी, क्योंकि उनको अब बहुत आनंद आ रहा था इसलिए वो इतनी खुश हो चुकी थी। फिर मैंने कुछ देर धक्के देकर मज़े लेने के बाद अब अपनी मामी को अब घोड़ी बनने को कहा तो वो अब अपने दोनों घुटनों और अपने हाथों के बल अपनी गांड को मेरी तरफ करके बैठ गयी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब सबसे पहले मैंने अपने दोनों हाथों से उनके कूल्हों को पकड़कर पूरा फैला दिया और तब मुझे उनकी गांड का वो बड़े आकार का छेद नज़र आ रहा था, जो बड़ा ही आकर्षक नजर आ रहा था और अब मेरा लंड उस छेद में घुसने के लिए बिल्कुल तैयार था। फिर मैंने अपना लंड जैसे ही उनकी गांड के छेद पर टिकाया, तो उसी समय मेरी मामी ने मेरा इरादा समझकर मुझसे ऐसा करने से मना कर दिया और वो मुझसे कहने लगी कि नहीं इसको गांड में डालने से मुझे बहुत दर्द होगा, लेकिन मेरा लंड है कि अब मानता नहीं और में उनसे बहुत बार ज़िद करने लगा। फिर मामी कुछ देर बाद मान गयी और उन्होंने मुझसे कहा कि धीरे धीरे डालना वरना मुझे दर्द होगा, में अब अपने लंड को लेकर तैयार हो गया और उसको में मामी की गांड में डालने लगा। में बहुत अच्छी तरह से जानता था कि मामी को दर्द हो रहा है, लेकिन मुझे तो मज़ा आ रहा था और तब मैंने महसूस किया कि उनकी गांड का छेद बहुत छोटा और टाइट भी था, इसलिए बहुत मुश्किल से अंदर जा रहा था। फिर मैंने भी अपना पूरा ज़ोर लगा दिया था उसको अंदर डालने के लिए और अब धीरे धीरे जगह बनती गयी और उनकी गांड कका छेद फैलने लगा, जिसकी वजह से मेरा लंड और भी ज्यादा अंदर घुसता चला गया।

अब में अपने लंड को धीरे धीरे अंदर और बाहर करता गया जिसकी वजह से मामी की चिकनी टाईट गांड में मेरा लंड बड़े मज़े कर रहा था। फिर मैंने कुछ देर बाद अपना लंड उनकी गांड से बाहर निकाल लिया और अब मैंने मामी को लेटा दिया और उसके बाद में उनके पेट पर बैठ गया और अपने लंड को दोनों बूब्स के ठीक बीच में रखकर बूब्स को सहलाने लगा और उस समय मैंने अपनी मामी से कहा कि क्या मस्त चिकने बूब्स है तो मामी मेरी बात को सुनकर शरमाने लगी और तब मैंने अपनी मामी से कहा कि प्लीज आप एक बार मेरे लंड को चूसो ना। फिर मामी ने उस समयी मेरे लंड को पकड़ा और वो उसको अपने नरम मुलायम गालों से सहलाने लगी और तब उन्होंने मुझसे पूछा कि क्यों मुझे कैसा लग रहा है? तब मैंने कहा कि पहले आप इसको अपने मुहं में लेकर चूसो उसके बाद में आपको बताऊंगा। अब मामी मेरे लंड को अपनी जीभ से चाटने लगी और फिर वो अपने दांतों से हल्के सा काटने भी लगी थी। उसके बाद वो मेरे लंड को लोलीपॉप की तरह अपने मुहं में लेकर अपनी जीभ को टोपे पर घुमाकर चूसने लगी थी और में तो उनके ऐसा करने की वजह से मज़े में एकदम पागल हो रहा था। वो सब मुझसे सहा नहीं गया और में एकदम जोश में आ चुका था और उसी समय मैंने उनके मुहं में ही अपना वीर्य निकाल दिया। फिर मामी मेरे वीर्य को अपनी जीभ से चाटने और मेरे लंड को चूसने लगी और फिर मामी ने मुझसे कहा कि यह तुमने क्या किया? अब में समझ गया था कि मामी मेरे लंड से अभी और भी मज़े और मेरे लंड से अपनी चुदाई करवाना चाहती है, तब मैंने उनसे कहा कि आप बिल्कुल भी घबराओ नहीं, अभी में तुम्हे और भी मस्त चुदाई के मज़े दूंगा, लेकिन तब तक मेरा लंड मुरझा चुका था इसलिए लटके हुए लंड को देखकर मामी का चेहरा भी लटक गया और वो उदास सी नजर आने लगी थी। अब में अपनी मामी के बूब्स को पकड़कर चूसने उनको दबाने लगा था और साथ ही साथ में अपनी मामी की चूत को अपनी उँगलियों से सहलाने भी लगा था।

फिर मैंने छूकर महसूस किया कि मेरी मामी की उस गीली गरम चूत में अभी भी बहुत जोश बाकी था इसलिए उन्होंने भी अब जोश में आकर मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया और धीरे धीरे मेरा लंड एक बार फिर से तनने लगा था और उसका आकार अब बदलने लगा था और जैसे ही मेरा लंड थोड़ा सा खड़ा हुआ तो मेरी मामी ने उसको अपने मुहं में ले लिया और वो उसको ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी। मेरा पूरा लंड उनके मुहं में जाकर उनके गले तक छू रहा था। फिर तब मुझे उनकी उस हरकत से पता चला कि वो आज मुझसे किसी भी हाल में अपनी चुदाई करवाना चाहती थी और वो मेरे लंड को बार बार अपने मुहं में पूरा अंदर डालती और फिर धीरे धीरे उसको बाहर निकालती और वो मेरे लंड को इतनी ज़ोर से चूस रही थी कि उनके चूसने की आवाज भी अब आने लगी थी।

अब मेरा लंड भी उनकी चुदाई के लिए तैयार हो गया था और में भी उनके चेहरे को अपने हाथ में लेकर अपने लंड को अंदर डालने लगा था, जिसकी वजह से मुझे वाह क्या मस्त मज़ा आ रहा था। फिर मामी ने मुझसे कहा कि प्लीज अब तुम मुझे चोदो ना, मेरी इस प्यास को बुझा दो और आज अपनी चुदाई से तुम मुझे पूरी तरह से बिल्कुल ठंडा कर दो, आज तुम मुझे जमकर चोदो और फाड़ दो तुम आज मेरी इस चूत को, इसने मुझे बड़ा परेशान किया है। तभी मैंने अपनी मामी की बातें सुनकर जोश में आकर उनको लेटा दिया और में उनकी जांघो को अपनी जीभ से चाटने लगा। कुछ देर चाटते चाटते में अब उनकी गोरी भरी हुई कमर तक पहुंच गया। फिर मैंने देखा कि अब मेरी मामी मज़े से मचल उठी और तभी मैंने उसकी एक जांघ को अपने कंधे पर रख लिया और अपने मस्त जोशीले लंड को उनकी गीली कामुक चूत में टिका दिया और एक जोरदार धक्का देकर चूत के अंदर डाल दिया और फिर उसके बाद मैंने उसको इतनी रफ़्तार से धक्के देकर चोदना शुरू किया कि वो पूरी हिलने लगी और वो सिसकियाँ लेते हुए मुझसे बोल रही थी उफफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह्ह प्लीज थोड़ा धीरे धीरे करो स्सीईईई मुझे बहुत दर्द हो रहा है ऊह्ह्ह हल्के हल्के धक्के दो वरना में आज इस दर्द से मर ही जाउंगी, प्लीज थोड़ा आराम से करो उससे ज्यादा मज़ा आएगा।

दोस्तों मैंने महसूस किया कि मामी की चूत अब पहले से ज्यादा गीली चिकनी हो चुकी थी इसलिए मुझे धक्के देकर उनको चोदने में और भी ज्यादा मज़ा आ रहा था, क्योंकि मेरा लंड उनकी चूत में बड़ी ही आसानी से फिसलकर अंदर बाहर हो रहा था और धक्के दे देकर मैंने मामी की चूत को पूरी तरह से ढीली कर दिया था और मुझे डर था कि कहीं मामा को पता ना चल जाए और वो मुझसे नाराज न हो जाए, क्योंकि पहले मामी की चूत बहुत टाइट थी और मैंने उसको अपने लंड से चोद चोदकर इतनी ढीली कर दी थी। फिर मैंने कुछ देर धक्के देने के बाद अपनी चुदक्कड़ मामी से कहा कि चलो अब हम कोई दूसरी तरह से मज़े भी करके देखते है और वो तुरंत तैयार हो गई। अब मामी ने मुझे पलंग पर एकदम सीधा लेटने के लिए कहा तो में लेट गया और उसके बाद वो मेरे ऊपर चड़ गयी। फिर उसके बाद वो अपने पपीते के आकार के बूब्स के हल्के भूरे रंग के तने हुए निप्पल को नीचे झुकते हुए मेरे होंठो के पास लाने लगी। अब में उनके निप्पल को अपने मुहं में लेकर पहले कुछ देर चूसने लगा और उसके बाद में उनको हल्के से काटने भी लगा था, जिससे उनको दर्द हुआ। फिर मैंने उनके दोनों बूब्स को दबा दबाकर निप्पल को चूसकर एकदम लाल कर दिया था और गोरे रंग के निप्पल का रंग अब लाल हो चुका था। फिर वो उसके बाद मेरे लंड को पकड़कर मेरे लंड के टोपे से अपनी चूत के दाने को सहलाने लगी और उसके बाद धीरे धीरे वो उसको अंदर डालने भी लगी थी। जब लंड पूरा का पूरा चूत के अंदर जा पहुंचा तो मामी मेरे लंड के ऊपर बैठकर उसकी सवारी करने लगी और अब वो ऊपर नीचे होकर धीरे धीरे हिलने लगी, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और में उनकी कमर को पकड़कर सहारा देकर उनका साथ देने लगा था और जब वो मेरे ऊपर बैठकर ऊपर नीचे हो रही थी तो तब उनके बड़े बड़े बूब्स भी हिल रहे थे वो मस्त सेक्सी नज़ारा में कभी भी नहीं भूल सकता।

अब में मामी के गोरे गोरे बूब्स और उनकी गुलाबी गुलाबी निप्पल को अपने हाथ से सहला दबा भी रहा था और अब वो भी मेरे हाथ पर अपने हाथ को रखकर अपने बूब्स को दबा भी रही थी। वो उस समय बहुत जोश में थी इसलिए वो यह सब करने लगी थी। फिर मैंने फिर मामी की गांड को कसकर पकड़ा और में उसको ज़ोर से दबाकर अपनी मुठ्ठी में कसने लगा और फिर कुछ देर धक्के देने के बाद मैंने अब मामी को अपने नीचे लेटा दिया और में उनके उपर मेढक की तरह चढ़कर बैठ गया। फिर में मामी को ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर उनकी चुदाई करने लगा था। अब मामी अपने दोनों हाथों से मेरी गांड को पकड़कर मुझसे कहने लगी उफ्फ्फफ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से धक्के लगा आह्ह्ह्ह हाँ ऐसे ही धक्के देकर चोद मुझे आईईईई आज तुम मुझे जमकर चोदो, में कब से ऐसे मज़े मस्ती के लिए तरस रही हूँ आज मुझे कोई दमदार पूरे मज़े देने वाला लंड मिला है आज तू मुझे प्यासा मत छोड़ना, देता जा बस ऐसे ही धक्के में तुझसे कुछ भी नहीं कहूंगी और आज तू मेरी इस चूत को चोद चोदकर इसका भोसड़ा बना दे और इतना कहने के साथ ही साथ वो भी अपनी तरफ से मुझे धक्के मारने लगी थी। मैंने उनको धक्के देकर चोदना अब पहले से और भी तेज़ कर दिया था और तभी मैंने दो चार धक्के देने के बाद महसूस किया कि अब मामी की चूत से पानी निकल गया और वो झड़ने के बाद पूरी तरह से खुश चेहरे से संतुष्ट नजर आ रही थी वो एकदम निढाल होकर पड़ गई, लेकिन मैंने तब भी अपने धक्के देने बंद नहीं किए और में धक्के लगाता रहा और कुछ देर धक्के देने के बाद मैंने भी झड़कर अपना वीर्य उनकी चूत के अंदर ही गिरा दिया, जिसकी वजह से मेरा भी जोश धीरे धीरे ठंडा होता चला गया तब भी मेरा लंड उनकी चूत में ही था। फिर मामी ने मुझसे कहा कि मुझे ऐसे कभी भी किसी ने चोदकर यह सभी मज़े नहीं दिए है, मुझे तुम्हारा चुदाई करना का तरीका और यह जोश देखकर ख़ुशी के साथ साथ बड़ी हेरानी भी हो रही है, तुम बहुत अच्छी चुदाई करते हो तुम्हारे साथ में आज मज़ा ही आ गया।

दोस्तों में अब उस दमदार चुदाई की वजह से बिल्कुल ही थककर उनके ऊपर पड़ गया और अब में कुछ भी करने की बिल्कुल भी हालत में नहीं था। मेरे हाथ पैरों ने मुझे अब कुछ भी करने से जवाब दे दिया था और तभी मैंने पास की दीवार पर लगी घड़ी की तरफ देखा तो उस समय चार बज रहे थे। दोस्तों यह ऐसी ही मस्त चुदाई मैंने पूरे 6 दिनों तक लगातार की और उनको मैंने हर बार जब भी मुझे मौका मिलता चोदकर चुदाई के मस्त मज़े दिए और फिर जब भी में अपनी मामी के घर पर जाता हूँ तो में अपनी मामी को किसी ना किसी बहाने से कभी होटल में ले जाकर तो कभी घर में ही चोदता हूँ और वो हर बार मेरा पूरा पूरा साथ देती है। हम दोनों चुदाई करके हमेशा बहुत ही खुश रहते है ।।

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धन्यवाद …

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