माँ का गरम दूध और नंगी चूत

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, में एक बार फिर से आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेने वालों के लिए अपना दूसरा सेक्स अनुभव लेकर आया हूँ। दोस्तों यह मेरे जीवन की एक सच्ची चुदाई की घटना है, जिसमें मैंने अपनी माँ को बहुत जमकर चोदकर उनके जिस्म की आग को पूरी तरह से शांत किया और उनकी चुदाई के समय मुझे बहुत जोश आ गया और में लगातार मस्त चुदाई करता रहा। उस चुदाई में उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया और बहुत मज़े किए और वैसे इस चुदाई को करने से पहले भी में अपनी माँ को चोद चुका था, इसलिए हम दोनों के मन में डरने की कोई भी बात और शंका नहीं थी। हम दोनों एक दूसरे में पूरी तरह से डूबकर चुदाई के वो मज़े लेते रहे और हमें जब भी जैसा भी मौका मिला हमने उसका वैसे ही फायदा उठाया और अब में बताता हूँ कि मैंने वो सब कैसे किया अब आप मेरी कहानी को पढ़े उसके मज़े ले।

दोस्तों उस दिन जैसे ही मुझे पता चला कि मेरे पापा तीन दिन के लिए बाहर उनके किसी काम की वजह से जा रहे है तभी में वो बात सुनकर मन ही मन खुशी से झूम उठा, क्योंकि अब मुझे मेरी मन मर्जी के काम करने की पूरी पूरी आजादी थी और मुझे कहने रोकने टोकने वाला अब घर में कोई भी नहीं था और अब में बड़ी ही बेसब्री से रात के आने का इंतज़ार करने लगा था और वैसे मेरे चेहरे की रोनक को देखकर अब तक मेरी माँ भी मेरे मन में क्या चल रहा है समझ चुकी थी, लेकिन फिर भी वो चुप रहकर मन ही मन खुश थी। दोस्तों में उन सभी लोगो को बता दूँ जो पहली बार मेरी माँ का परिचय ले रहे है, मेरी माँ बहुत ही हॉट सेक्सी औरत है और उनका फिगर भी बहुत ही आकर्षक है। उनके वो बड़े बड़े बूब्स, उनका बहुत गोरा रंग जिसको देखकर हर किसी का लंड पानी छोड़ दे और वो आकर्षक होने के साथ साथ बड़ी ही मदमस्त चीज़ है। दोस्तों अब क्योंकि में अपनी माँ के साथ पहले भी सेक्स कर चुका था, इसलिए हम दोनों एक दूसरे से आपस में पूरी तरह से खुल गये थे और थोड़ा भी डर या झिझक हमारे बीच में नहीं थी, लेकिन इस बार बहुत दिनों के बाद मेरे हाथ में यह मौका आया था। फिर उसी शाम को मेरे पापा हम दोनों से बाय कहकर के चले गए और उनके चले जाने के बाद अब माँ किचन में अपने कामों में मुझे बहुत व्यस्त नजर आ रही थी और तभी मैंने किचन में चुपचाप जाकर माँ को पीछे से जाकर उनको अपनी बाहों में जकड़ लिया और अब में उनसे बोला कि आज तो में दूध पिऊँगा। फिर वो हंसते हुए मुझसे कहने लगी कि हाँ जी भरकर पी लेना अभी इसको गरम तो हो जाने दे, तब मैंने हंसते हुए उनसे कहा तो जल्दी से गरम करो ना, में तो अभी इसी समय पीना चाहता हूँ। मुझसे ज्यादा देर नहीं रुका जाता और मुझे जल्दी से दूध पीना है। फिर वो बोली कि आज में तुझे बहुत स्पेशल दूध केसर बदाम डालकर दूंगी और उसके स्वाद को तू हमेशा याद रखेगा कभी नहीं भूल सकता। अब मैंने उनसे कहा कि मुझे काली भैंस का नहीं बल्कि आज तुम्हारा दूध पीना है। पूरी दुनिया में इससे स्पेशल दूध और कहाँ होगा? तभी माँ हंसते हुए मुझसे बोली कि तू बड़ा बदमाश हो गया है, चल अब भाग यहाँ से मुझे काम करने दे। फिर मैंने उनसे कहा कि आप थोड़ा जल्दी करना और फिर में बाहर आकर टीवी सीरियल देखने लगा और फिर मैंने देखा कि टीवी के दूसरे चेनल पर एक मस्त सेक्सी फिल्म आने लगी वो मुझे बहुत अच्छी फिल्म लगी और में उसको देखने लगा और वो सीरियल खत्म होने पर मम्मी अपने कमरे में जाते हुए मुझसे बोली कि मैंने दूध गरम करके रख दिया है और तुम जाकर उसको पी लेना। फिर मैंने कहा कि मुझे यह नहीं पीना, लेकिन वो मेरी बात को अनसुनी करके मुझसे कहने लगी कि में अब सोने जा रही हूँ और ख्याल रखना ज़्यादा देर नहीं हो अब माँ वो दूध अपने साथ लेकर पहले अपने कमरे में चली गई और तभी में तुरंत समझ गया और अब इसलिए मैंने जल्दी ही टीवी बंद को करके में अपनी माँ के रूम में चला गया और तब मैंने देखा तो माँ उस समय लेटी हुई थी। अब में भी उनके पास में जाकर लेट गया और उसके बाद में अपनी माँ के बूब्स पर अपने एक हाथ को फेरने लगा। फिर उन्होंने अपने ब्लाउज के बटन खोल रखे थे और उसी समय मैंने उनसे पूछा कि माँ क्या हुआ, लेकिन वो कुछ नहीं बोली और अब मैंने उनकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और उसी समय में उनसे बोला कि क्यों अपने इन दोनों को क़ैद कर रखा है आप इनको कम से कम रात के समय तो आज़ाद कर दिया करो और मैंने उनके बूब्स को दबा दिया।

फिर उन्होंने अपने ब्लाउज को उतार दिया, जिसकी वजह से अब माँ के वो दोनों बूब्स बिल्कुल आज़ाद हो चुके थे और वो दोनों गोरे बड़े आकार के बूब्स क्या मस्त आकर्षक थे और अब माँ मुझसे बोली कि दूध पास वाली टेबल पर रखा हुआ है, तुम उसको पी लो ना और फिर माँ उठकर वो दूध का गिलास ले आई, तो मैंने तुरंत उसी समय उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और वो झट से नीचे आ गिरा और तब मैंने देखा कि माँ ने उस समय अपने पेटीकोट के नीचे कुछ भी नहीं पहना हुआ था। फिर वो मुझसे बोली कि यह लो दूध पी लो, तब मैंने उनसे कहा कि जब सामने खुद इतनी सुंदर दूध वाली खड़ी हो तो यह काली भैंस का दूध कौन पियेगा? और उनको इतना कहकर मैंने उनके बूब्स को ज़ोर से दबा दिया और फिर उन्हे मैंने बिना देर किए तुरंत अपने मुहं में ले लिया, तो माँ ने कहा कि लेकिन इसमे दूध कहाँ है? यह शब्द कहते हुए उन्होंने मेरे मुहं में से अपनी निप्पल को छुड़ाकर वो उठी और दूध का गिलास उठाकर उन्होंने मेरे मुहं से लगा दिया। अब मैंने थोड़ा सा दूध पिया और गिलास को लेकर बाकी बचा हुआ दूध पीने के लिए मैंने माँ के मुहं में लगा दिया और माँ ने भी थोड़ा सा दूध पीकर मुहं से गिलास को हटाते हुए कहा कि मैंने पहले ही दूध पी लिया था और इस बीच थोड़ा सा दूध छलकर माँ के बूब्स पर जाकर गिर गया और में उसको अपनी जीभ से चाटने लगा। अब तो माँ अपने हाथ में उस गिलास को लेकर अपने दोनों बूब्स पर धीरे धीरे करके बारी बारी से दूध को गिराती रही और में मज़ा ले लेकर उनके निप्पल को लगातार चाटता चूसता गया और बूब्स को चाटने से माँ के सारे बदन में सुरसुरी होने लगी और वो पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और इस बीच थोड़ा सा दूध नीचे की तरफ बहकर माँ की नाभि से होता हुआ उनकी चूत तक पहुंच गया। अब मेरी जीभ उस टपकते हुए दूध को चाटते हुए धीरे धीरे नीचे आ रही थी और उस वजह से माँ के पूरे बदन में सनसनी फैलती जा रही थी और माँ अपने गोरे उभरे हुए बूब्स पर धीरे धीरे दूध को गिराए जा रही थी और वो दूध उन दोनों बूब्स के बीच से होता हुआ नीचे की तरफ आ गया था। अब मेरे होंठ माँ की चूत के ठीक ऊपर पहुंचकर उस बहते हुए दूध को चूसे जा रहे थे और में फिर से अपनी जीभ को ऊपर की तरफ करते हुए अब उनके दोनों बूब्स के पास ले आया और अब में उनके दोनों बूब्स को हल्के से दबाकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा था। अब माँ भी बहुत गरम हो रही थी और वो मुझसे बोलने लगी ओह्ह्ह्हह आह्ह्हह्ह मेरे राजा हाँ तुम इस तरह से ही चूसते और चाटते रहो वाह मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। फिर मैंने उनसे कहा कि वाह क्या मस्त मजेदार दूध है, ऐसा नशा और कहाँ है? मुझे तो हर दिन बस यही पीना है, तभी माँ बोली कि तुम यह क्या कर रहे हो? में इस मस्ती से बिल्कुल पागल हो रही हूँ? ओह्ह्ह्हह्ह मेरे राजा चाटो और ज़ोर से चूसो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है आह्ह्ह्ह तुमने यह क्या किया? और अब में उनके बूब्स को वैसे ही लगातार चूसता रहा और फिर माँ ने मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया, तो में उनसे बोला कि तुम भी इसका दूध पी लो ना और तब वो मुझसे बोली कि इसमें दूध कहाँ होता है? में बोला कि दूध नहीं तो मलाई तो होती है? और उस पर माँ ने दूध गिरा दिया और गिलास में जो मलाई थी उसको उन्होंने मेरे लंड पर डाल दिया और अब वो उसको अपनी जीभ से चाटने लगी और वो अपनी जीभ को मेरे लंड पर गोलाई में घुमाने लगी थी।

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फिर मैंने उसके सर को पकड़कर कहा कि चूस ले ना अब इसका मलाई वाला दूध और इतना कहकर मैंने अपने लंड को माँ के मुहं की तरफ धकेल दिया और अब तो वो उसको अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और कुछ देर बाद वो मेरे लंड को अपने मुहं से अंदर बाहर करके ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी। उनके मुहं से उम्म्म्म उम्म्म अहह्ह्ह्ह की आवाज़ आ रही थी और तब तक मेरा लंड तनकर बहुत बड़ा हो गया था और वो मेरी माँ की चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार होकर खड़ा था। माँ भी अब बहुत जोश में होने की वजह से रुक नहीं पा रही थी और माँ की चूत भी मेरे लंड को पाने के लिए बड़ी बेकरार थी और मेरा लंड भी अब माँ की चूत से मिलने के लिए उतना ही बेकरार था। अब माँ बिल्कुल सीधी होकर लेट गई थी, जिसका मतलब एकदम साफ था कि उसने मुझे अपनी चुदाई का निमंत्रण दे दिया था और वो मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर अब वो मज़े लेना चाहती थी। फिर में भी अब तुरंत ही माँ के ऊपर आ गया और अपने लंड को उनकी गीली कामुक चूत के मुहं पर रखकर मैंने एक ही जोरदार झटके में माँ की चूत में अपना पूरा लंड डाल दिया और उसके बाद माँ भी नीचे से अपनी कमर को उठाकर मेरे लंड को और अपनी चूत को उन दोनों को आपस में मिलाने में अपनी तरफ से पूरा पूरा सहयोग देने लगी थी। वो दोनों उस समय इस प्रकार मिल रहे थे कि मानो वो बरसो बाद एक दूसरे से मिले हो। फिर मैंने अपने धक्को की स्पीड को बढ़ाते हुए उससे पूछा कि में अब क्या करूँ मेरी रानी माँ? तब माँ बोली कि अंदर तक तो कर दिया, अब तू मुझसे पूछता है कि क्या करूँ? चल चुदक्कड़ कहीं का उन्होंने मेरे होंठ चूम लिए और वो बोली किए जा जैसी तेरी इच्छा। में अब और धक्के लगा रहा था और माँ की चूत नीचे से उनका जबाब दे रही थी और उस समय हमारी घमासान चुदाई चल रही थी और माँ के मुहं से सिसकियाँ निकलने लगी थी वो आहह्ह्ह्हह्ह आईईईईईईई क्या कर रहा है रे थोड़ा ज़ोर से धक्के देकर चोद मेरे राजा चोद मेरी चूत भी कम नहीं है, थोड़ा कस कसकर धक्के मारो मेरे राजा, चोदो ज़ोर से मेरी इस चूत को, जो हमेशा तुमसे हर एक पल चुदने के लिए बेचैन रहती है, हाँ ज़ोर से धक्के देकर चोद दो तुम मुझे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

दोस्तों अब तो में भी उनका वो जोश देखकर एकदम तूफान मैल की तरह धक्के देकर चुदाई करने लगा था। में उनकी चूत से अपना पूरा लंड बाहर निकालता और फिर धक्का देकर उसको पूरी गहराई तक अंदर डाल रहा था और में तो उस समय स्वर्ग की हवाओं में उड़ने लगा था। में कहने लगा वाह क्या मस्त मज़ा आ रहा है मेरी रानी ले खा जमकर खा मेरा लंड। फिर वो बोली हाँ मेरे राजा थोड़ा और ज़ोर से आईईईईईइ मुझे भी बड़ा मज़ा आह्ह्हह्ह् आ रहा है हाँ और ज़ोर से ओह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह ओह्ह्ह मेरे राजा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। फिर में भी अब ऊपर से कस कसकर धक्के पे धक्के लगाते हुए बोल रहा था हाँ मेरी रानी आआईईई तुम्हारी चूत ने तो आज मेरे लंड को पागल बना दिया है वाह में तो इस सुंदर चूत का आज बिल्कुल दीवाना हो गया हूँ और में इसको चोद चोदकर जब तक तुम चाहोगी में जन्नत की सैर करूँगा, रानी मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है।

फिर माँ भी बोली उईईईईईई चोद चोद और ज़ोर से धक्के देकर चोदो मेरे राजा साथ साथ गिरना ओह्ह्ह् आईईईईई आ जाओ चोद दो ओहह्ह्ह ओहहह हाँ मेरे सनम अब में नहीं रुक सकती ओह्ह्ह्ह में गई। तो इधर में अपनी तरफ से उसको कस कसकर लगातार धक्के लगाकर हम दोनों साथ साथ ही झड़ गए और सचमुच इस चुदाई से में बहुत खुश था और माँ भी पूरी मस्ती में आकर मेरे साथ अपनी चुदाई का भरपूर मज़ा ले रही थी और अब हम दोनों ही झड़ चुके थे। अब मैंने माँ का एक जोरदार किस लिया और माँ के दोनों बूब्स के बीच में अपने सर को रखकर में उनके ऊपर थोड़ी देर पड़ा रहकर अब में माँ के बगल में ही लेटने के बाद उनके पास उनसे लिपटकर सो गया। फिर दूसरे दिन सुबह माँ ने मुझे उठाया और उन्होंने मुझसे कहा कि उठाना नहीं है क्या? और उन्होंने मेरे लंड को हल्का सा दबा दिया कहा कि जल्दी से फ्रेश हो जाओ। फिर मैंने उठकर ब्रश किया और फिर माँ मेरे लिए चाय ले आई और हम दोनों ने चाय पी और फिर मैंने कुछ देर बाद देखा कि माँ अब अपने दोनों मोटे मोटे कूल्हों को मटकाती हुई बाथरूम की तरफ चली गयी। अब में भी तुरंत माँ के पीछे पीछे बाथरूम में चला गया और अंदर जाकर मैंने दरवाजे को बंद कर दिया। मैंने देखा कि अब माँ ने अपने पूरे कपड़े एक एक करके उतार दिए और मैंने भी अपने सभी कपड़े उतार दिए और अब मैंने फव्वारे को खोल दिया, जिसकी वजह से अब हम दोनों के नंगे गरम जिस्म पर पानी की फुहार पड़ने लगी थी और में बाथरूम में लगे बड़े आकार के शीशे में सब देख रहा था। दोस्तों उस पानी के नीचे माँ के उत्तेजक गोरे बदन और उनके बड़े बड़े बूब्स पर पानी टपक रहा था और वो बूब्स से टपकता हुआ पानी जो उनके दोनों पैरों के बीच में उनकी चूत से होता हुआ पैरों पर छोटी छोटी धार बनाते हुए नीचे गिर रहा था, जो बहुत ही सेक्सी लग रहा था और मेरी छाती से नीचे गिरता हुआ मेरे लंड पर से धार बनाकर बहता हुआ वो पानी आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। अब माँ ने मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया और लंड के ऊपर की चमड़ी को वो खोलने और बंद करने लगी थी। मेरा लंड उनके हाथ में आते ही एकदम कड़क होकर खड़ा हो गया और अब मैंने माँ के बूब्स को और उनके पूरे शरीर को अपनी छाती से चिपकाकर उनके होंठो को अपने होठों में ले लिया। अब माँ के कसे हुए बड़े बड़े बूब्स मेरी छाती से रगड़ खाने लगे थे और फिर माँ ने मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत से सटा लिया और थोड़ा पैर फैलाकर चूत पर रगड़ने लगी। फिर मैंने माँ के पूरे बदन पर साबुन लगा दिया और उसके बाद उनके बूब्स को और चूत के ऊपर भी मैंने साबुन लगाकर मसल दिया और फिर हम दोनों एक दूसरे के बदन पर फिसलने लगे और माँ अपने बूब्स को मेरे पूरे बदन पर दबाकर फिसला रही थी, जिससे मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

फिर मैंने पानी को तेज कर दिया और साबुन को धो दिया इसके बाद में माँ के बूब्स को दबाते और सहलाते हुए माँ के होठों को चूस रहा था और मेरे लंड को माँ की चूत अपने होंठो से सहला रही थी। अब नीचे बैठकर नहाने के लिए रखे स्टूल पर माँ ने अपना एक पैर उठाकर रख लिया और अब मेरे लंड को चूत में जाने का मौका मिल गया और मुझे उस शीशे में उनकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर होते हुए साफ साफ दिख रहा था। वो देख रही थी कि उनकी प्यारी चूत से मेरा लंड खिलवाड़ कर रहा था और अब माँ की चूत उसको पूरा अपने मुहं में लेने की कोशिश कर रही थी। फिर तभी कुछ देर बाद माँ अपने आपको छुड़ाकर नहाने के टब को पकड़कर नीचे झुक गयी और माँ के गोल गोल बड़े बड़े कूल्हे ऊपर उठे हुए थे और में उन्हे दबा दबाकर अपनी जीभ से चाटने लगा और दाँत से काट भी रहा था। तब माँ बोली कि तू यह क्या करता है अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है और में माँ की चूत को देखने लगा। अब मैंने उस पर अपने तने हुए लंड को लगाकर धक्का दे दिया और मेरा पूरा लंड गप से माँ की गीली जोश से भरी हुई चूत में पूरा समा गया और फिर क्या था लंड और चूत का वही पुराना खेल शुरू हुआ और सामने लगे उस शीशे में जैसे कोई ब्लूफिल्म चल रही हो, जिसकी हिरोइन मेरी माँ थी और उसका हीरो में खुद। मेरा लंड माँ की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, जिससे माँ की चूत बिल्कुल पागल हो रही थी, लेकिन मुझे शीशे में लंड का घुसना और निकलना बहुत अच्छा लग रहा था और उस फुवारे से पानी की वो फुहार हम दोनों पर पड़ रही थी। हम लोग उसकी परवाह ना करके अपने तन की आग को मिटाने में लगे हुए थे और में पीछे से माँ के दोनों बूब्स को पकड़ कर बराबर धक्के लगाए जा रहा था। अब उस शीशे में अपनी चुदाई को देखकर माँ भी बहुत गरम हो चुकी थी, इसलिए माँ भी अपने कूल्हों को अब लगातार आगे पीछे करके मेरे लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर कर रही थी और वो अपनी चूत में मेरे लंड को गपागप ले रही थी और वो अब बोलती जा रही थी अरे यार आह्ह्ह्हहह मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, हाँ और ज़ोर से धक्के देकर चोदो मेरे सनम उफ्फ्फ हाँ आज तुम जिंदगी का पूरा मज़ा ले लो आईईईई मेरे चोदू बलम तुम्हारा यह लंड बड़ा ही जानदार है हाँ और मारो मेरे राजा धक्का मुझे और ज़ोर से आह्ह्ह मेरे राजा और ज़ोर से और ज़ोर से हाँ तुम आज इस जालिम लंड से मेरी इस चूत को फाड़ दो आह्ह्हह्ह मुझे बहुत अच्छा उह्ह्ह्हह्ह लग रहा है आईईईईई। फिर मैंने उनसे कहा कि पीछे से धक्के देकर चुदाई में मेरे हाथ झुके झुके अब बहुत दुखने लगे है, तब माँ बोली उफफ्फ्फ्फ़ मेरे राजा तुम अब ज़रा रूक जाओ, इस तरह पूरी चुदाई नहीं हो पा रही है और मुझे लगता है कि लेटकर चुदने में पूरा लंड चूत की गहराई तक जाता है और तब झड़ने में बहुत मज़ा आता है। फिर मैंने अपने लंड को माँ की चूत से बाहर निकाल लिया और उसके बाद पानी को बंद किया और अब माँ वहीं पर गीली ज़मीन पर उसी समय नीचे लेट गयी और वो मुझसे बोली कि अब तुम मेरे ऊपर आकर मेरी जमकर मज़ेदार चुदाई करो।

अब में माँ के ऊपर था और मैंने माँ की चूत में अपने लंड को पूरा अंदर डालकर में भरपूर चुदाई करने लगा था। में उनको अपनी तरफ से जोरदार मस्त धक्के दिए जा रहा था और माँ की चूत में मेरा लंड पूरा का पूरा अंदर बाहर हो रहा था और माँ नीचे से उछल उछलकर मेरा साथ देते हुए कुछ बड़बड़ा भी रही थी और अब मुझे चुदाई का मस्त मज़ा मिल रहा है उफफ्फ्फ्फ़ हाँ मारो मेरे राजा और ज़ोर से मारो धक्का और ज़ोर से हाँ राजा इस तरह से चोदो मेरी इस चूत को अहह्ह्ह्हह हाँ ओह्ह्ह्हह्ह में अब कस कसकर धक्का मारकर माँ की चूत को चोद रहा था और तभी थोरी देर बाद मेरा लंड माँ की चूत की गहराई में चला गया और हम दोनों एक साथ झड़कर ठंडे हो गये। माँ तब सुरक्षित दिनों में थी और यह बात माँ ने पहले ही मुझे बता रखी थी, इसलिए हम दोनों को किसी भी बात की कोई भी परवाह नहीं थी। फिर कुछ देर बाद मैंने अपने लंड को पानी डालकर अच्छी तरह से साफ किया और उसके बाद में अब टावल लपेटकर बाथरूम से बाहर आ गया और उसके बाद में अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गया। फिर कुछ देर बाद माँ भी नहाकर बाथरूम से पूरी नंगी बिना कपड़ो के बाहर निकलकर अब वो भी कपड़े पहनकर तैयार हो गयी। दोस्तों हम दोनों ने उस रात को फिर से अपनी चुदाई का काम शुरू किया और साथ में मिलकर उस मस्ती का भरपूर मज़ा लिया जिसमें उन्होंने मेरा पूरा पूरा साथ दिया। दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी पढ़ने वालों को मेरी यह चुदाई की कहानी जरुर अच्छी लगी होगी ।।

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धन्यवाद …

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