गाँव वाली भाभी की मस्ती

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, में आज जो घटना आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ, यह मेरी कामुकता डॉट कॉम पर पहली कहानी है। यह मेरा एक सच्चा अपनी भाभी के साथ सेक्स अनुभव है, तो में आप लोगों को यह बताना चाहता हूँ कि मैंने अब तक कोई भी कहानी नहीं लिखी, लेकिन में सेक्सी कहानियों को बहुत पहले से कई सालो से पढ़ता आ रहा हूँ और ऐसा करने में मुझे बहुत मज़ा आता है। दोस्तों मुझे कहानी लिखने का कोई तरीका नहीं पता है फिर भी में अपनी आज की इस सच्ची घटना को लिखने की कोशिश कर रहा हूँ। मैंने अब तक जितनी भी कहानियाँ पढ़ी है वो सभी मुझे अच्छी लगी, लेकिन उसमें से कुछ मुझे कल्पनीक भी लगी। दोस्तों आज में जो अभी लिख रहा हूँ यह मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है, वैसे अभी तो में पूना अपने काम की वजह से रहता हूँ और अब में आप सभी को और ज्यादा बोर नहीं करूंगा और सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ। दोस्तों यह बात आज से करीब पांच साल पुरानी है, जब से मुझे पता चला कि में अब बड़ा हो गया हूँ और उम्र के साथ साथ मेरे शरीर में कई तरह के बदलाव हो चुके थे, जिसको देखकर में खुश होने के साथ साथ थोड़ा चकित भी था, इसलिए मेरे मन में बहुत सारे सवाल थे। दोस्तों अब तक मैंने कभी भी दूसरी नज़रों से मेरी भाभी को नहीं देखा था, मेरी भाभी की शादी उसकी कम उम्र में ही हो गई थी और तब वो बस 18 साल की थी और मेरा भाई उस समय 25 साल का था। अब उनको दो लड़कियाँ और एक लड़का भी है, यह बात तब से शुरू हुई जब से उनको लड़का हुआ और में अपनी भाभी के उस काम की वजह से थोड़ा उनकी तरफ आकर्षित हो गया और उसी दिन से मेरे मन में उन नये नये सवालों, विचारो ने जन्म लिया और फिर मेरी सोच एकदम बदल गई। दोस्तों माफ करना में अपनी भाभी के बारे में तो आप सभी के बारे में बताना ही भूल गया और अब लिखता हूँ।

मेरी भाभी दिखने में सावली रंग की है और उनके बदन का आकार 36-24-36 है, उनके बूब्स मानो दो बड़े आकार की बॉल की तरह दिखते जो एकदम गोलमटोल होने के साथ साथ उनकी निप्पल भी हमेशा तनी हुई नजर आती थी। उनकी पतली कमर को बस लगातार देखते ही रहने का मेरा मन करता मेरा मन हमेशा करता था कि बस में उसको ऐसे ही घूरकर लगातार देखता रहूँ। भाभी के दोनों बूब्स के निप्पल मुझे ब्लाउज के अंदर से भी दिखने के साथ साथ मुझे एकदम साफ उनका आकार वो गोलाई नजर आती थी, जो मुझे हमेशा उनकी तरफ आकर्षित किया करते, इसलिए मेरा मन करता कि एक बार तो में उनकी कमर को चूम लूँ और साथ ही में उनके बूब्स को भी मसलने की मेरी इच्छा होती थी और उनके हर एक अंग को बस एक बार चूमने, प्यार करने की मेरे मन की तमन्ना थी। मेरा मन करता कि में बस उनको चूमता ही रहूँ। फिर यह बात उस दिन की है जब मेरे कॉलेज का एक दोस्त मेरे घर पर पहली बार आया था और उसको पता नहीं था कि वो मेरी भाभी है, उसको मेरी भाभी को पहली बार देखकर लगा कि वो कोई पड़ोस में रहने वाली कोई औरत है जो किसी काम से मेरे घर में आई है। फिर उसने मुझसे कहा कि अरे यार देख तो यह क्या मस्त लगती है? देख यह ऊपर से लेकर नीचे तक बड़ा ही मस्त माल है, शायद भगवान ने इसका यह बदन बहुत सोच समझकर तैयार किया होगा। फिर मैंने उसको उसी समय टोककर कहा कि वो मेरी भाभी है और तू उसको अपनी इस गंदी नज़रो से मत देख, तेरा यह कहना गलत है, तभी उसने बात को टालते हुए कहा कि में तो तुझसे बस मजाक कर रहा था और में तो तेरी भाभी की तारीफ कर रहा था। दोस्तों कुछ देर मेरे साथ बैठकर चाय नाश्ता करके वो अपने घर वापस चला गया, लेकिन तब से मैंने अपने उस दोस्त से बात कभी भी नहीं की क्योंकि मुझे उसकी वो सभी बातें बहुत गलत लगी, लेकिन मैंने उस दिन से उसकी उन बातों को अपने मन में ले लिया। अब में बस अपनी उस भाभी के बारे में ही सोचने लगा था, इसलिए मेरा उनकी तरफ कुछ ज्यादा ही झुकाव होने लगा शायद मेरा मन उनको पसंद करने लगा था। फिर जब भी में टीवी पर कोई गाना देखता था तो में वहां पर भी अपनी भाभी को देखता। में बस हमेशा उन्ही के बारे में सोचने लगा और मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था कि ऐसा मुझे क्या हो गया था? में जो भी कर रहा था वो गलत था या सही मुझे पता नहीं था, बस में अपनी भाभी की तरफ खिंचा चला गया।

फिर जब उनको दो लड़कियों के बाद एक बेटा हुआ, तब मैंने उनके बूब्स को पहली बार देखा और तब से में ऐसे ही छुप छुपकर चोरी छिपे उनको अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए देखता था और फिर में मन ही मन में सोचता था कि कब में भी अपनी भाभी के बूब्स को छूकर उनके बूब्स से दूध पीकर मज़े करूंगा? फिर करीब चार से पांच महीने के बाद जब में अपनी भाभी में घुलने लगा, जिसकी वजह से हमारे बीच की दूरियां अब बहुत कम होने लगी और में उनके साथ बहुत मजाक कभी कभी मस्ती भी करता था और तब में कभी कभी उनको छूने की कोशिश करने लगा था, लेकिन मैंने वो सब कभी भी उनको बिल्कुल भी महसूस नहीं होने दिया कि में क्या चाहता था या मेरे मन में उनके लिए गलत विचार आने लगे है? फिर अचानक से एक दिन में बीमार पड़ गया और उन्ही दिनों मेरी मामी पापा किसी काम से बाहर हमारे गाँव 18 दिनों के लिए गये हुए थे और मेरा बड़ा भाई सुबह ही अपने काम पर चला जाता जिसकी वजह से पूरा दिन घर में अब में अपनी भाभी के साथ अकेला रह गया था। फिर मेरी अब सभी तरह की सहायता मेरी भाभी ही किया करती थी, मुझे ठीक समय दवाई देना, खाना पीना और उसके अलावा भी वो मेरे सब काम करने लगी थी, इसलिए वो में अब पहले से ज्यादा पास आने लगी थी। फिर मैंने भी अब अपने मन में यह सोचा कि वैसे तो पूरे घर में अब हम दोनों के अलावा कोई भी नहीं है, क्यों ना उनसे थोड़ा अलग तरह की बातें करूं और उनको यह दिखाऊँ कि मुझे कुछ भी पता नहीं है, में अब नादान छोटा ही हूँ और फिर उसके बाद देखते है कि क्या होता है? मैंने ऐसा सोचकर अपनी बात को छेड़ दिया। भाभी अगर आप मुझसे नाराज़ ना हो तो क्या में आपसे एक बात पूछ सकता हूँ? तो भाभी ने कहा कि हाँ पूछो ना? फिर मैंने ऐसे ही फिर से कहा कि नहीं आप रहने दो वरना आप मुझे गलत समझोगी। फिर भाभी एक बार फिर से मुझसे ज़ोर देकर पूछने लगी हाँ पूछो ना वो क्या बात है? तब मैंने उनसे यह कहा कि आपके बूब्स से दूध कैसे निकलता है? तो वो मेरे मुहं से यह सवाल सुनकर एकदम चकित होकर बोली कि ऐसे ही आता है, जब बच्चा होता है यह तभी यह उस छोटे बच्चे का पेट भरने के लिए बाहर आता है। अब मैंने उनसे दूसरा सवाल पूछा क्या सही में आदमी की तरह औरतों को भी नीचे बाल होते है? तो वो हंसते हुए कहने लगी कि मुझे अब लगता है कि शायद तुम बड़े हो गये हो और यह कहकर वो मेरी बात को टालने लगी। अब मैंने उनको दबाव देकर पूछा प्लीज आप मुझे यह जवाब दो ना, में बाहर किसी दूसरी औरतों से यह नहीं जान सकता, आप जानती हो ऐसा करने से वो गलत समझकर मुझे मारेगी। फिर वो कहने लगी कि हाँ होते है, लेकिन बस अब तुम मुझसे इसके आगे कुछ भी मत पूछो, तुम बस चुपचाप सो जाओ में काम करने जा रही हूँ। फिर मैंने उसी समय लपककर उनका एक हाथ पकड़कर उनसे कहा कि बस एक और बात, में अब लगातार प्लीज प्लीज कहता ही रहा। तो वो बोली कि हाँ ठीक है, लेकिन तुम मुझसे दोबारा कोई भी गंदी बात नहीं पूछना। फिर भी मैंने हिम्मत करके थोड़ा धीरे से उनसे कहा कि आप मुझे सिर्फ़ एक बार आपके बूब्स को हाथ लगाकर छूने दो सिर्फ़ एक बार। तो वो यह बात मेरे मुहं से सुनकर मेरे ऊपर बहुत गरम होकर गुस्से में कहने लगी कि तुम बहुत ही बेशर्म होते जा रहे हो, मुझे अब लगता है कि तुम्हारी बात भैया से करनी पड़ेगी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर मुझसे यह कहकर वहां से बाहर चली गई। में अब डरने लगा कि अब वो मेरे भाई से कहकर मेरे काम पर पानी फेरकर सारा काम बिगाड़ रही है, लेकिन दोस्तों उसने कभी भी मेरे भाई से कुछ भी नहीं कहा कि क्योंकि मुझे मेरे भाई की तरफ से ऐसा कुछ भी महसूस नहीं हुआ जिसको देखकर में समझ गया और उन्होंने भाई को कुछ बात नहीं बताई। तो मुझे खुशी के साथ साथ अब और थोड़ा सा जोश हिम्मत आ गई और में फिर से उनको मनाने के लिए उनसे मजाक करता और में बातों ही बातों में उनसे वही पुरानी बात पूछता। मेरे मन में अभी भी उनके बूब्स को छूकर महसूस करने की बात थी। फिर वो कहने लगी कि तुम अभी तक भी बस वो एक ही बात को पकड़कर बैठे हो चलो ठीक है तुम रूको में अभी तुम्हारे कमरे में आती हूँ। अब यह बात उनके मुहं से सुनकर में खुश होकर तुरंत अपने कमरे में चला गया और फिर में उनका वहीं पर बैठकर इंतजार करने लगा। फिर थोड़ी ही देर के बाद वो कमरे के अंदर आ गई और वो भी मेरे पास आकर बैठ गयी और अब वो ऐसा बर्ताव मेरे साथ कर रही थी जैसे कि मानो कभी हमारे बीच कोई बात ही नहीं हुई हो। अब मैंने एक बार फिर से उनको आग्रह करके कहा कि प्लीज एक बार आप मुझे अपने बूब्स दिखा दो ना, आप मेरे मन की इस इच्छा को प्लीज आज पूरा कर दो। अब वो तुरंत उठकर मुझसे दूर होकर खड़ी हो गई और उसके बाद वो अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी एक एक करके उन्होंने सभी बटन खोल दिए। तब में वो द्रश्य देखकर मन ही मन उत्साहित होकर झट से उठ खड़ा हो गया। फिर वो कहने लगी कि सिर्फ़ तुम इसको दूर से देख सकते हो, में तुम्हे इनको हाथ लगाने की इजाजत नहीं दे सकती। अब मैंने उनसे कहा कि आप मेरे साथ धोखा कर रही हो, क्योंकि मैंने पिछली बार आपसे बूब्स को हाथ लगाने के बारे में कहा था। तो वो बोली कि हाँ ठीक है सिर्फ़ तुम हाथ ही लगाना, उसके अलावा कुछ नहीं करना और में जैसे ही उनके पास गया। उसने अपनी दोंनो आखों को बंद कर लिया, मैंने अपने एक हाथ में उनका एक बूब्स पकड़ लिया और दूसरे बूब्स को मैंने चूमना शुरू कर दिया। फिर वो मेरे ऐसा करते ही पूरी तरह से हिल गई और यह देखकर मैंने उनके बूब्स को अब मसलना शुरू किया और साथ ही साथ में निप्पल को अपने मुहं में भरकर चूसने भी लगा था। फिर वो मेरे यह सब करने की वजह से थोड़ी ही देर के बाद गरम होने लगी थी और वो उनका एक हाथ मेरे बालो पर फेरने लगी। फिर में यह सब देखकर अपना एक हाथ अब उनकी कमर पर पर घुमाने लगा। मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो धीरे धीरे जोश में आने लगी थी। फिर थोड़ी ही देर के बाद मैंने सही मौका देखकर उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और अब में साड़ी को खोलने की कोशिश करने लगा। अब वो मुझसे मना करते हुए कहने लगी नहीं तुम मेरे साथ ऐसा मत करो, अगर कोई आ जाएगा तो बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। फिर मैंने उनको समझाते हुए कहा कि हमारे अलावा इस पूरे घर में कोई भी नहीं है। फिर क्यों आप इतना डरती हो बताओ, मुझे हमे यहाँ कौन देखने वाला है? तो वो बोली कि अब तुम बस भी करो छोड़ दो मुझे जाने दो मुझे बहुत सारे काम करने है। फिर मैंने उनको कहा कि अब मैंने इतना तो देख ही लिया है, बस में नीचे भी वो सब एक बार देख लेता हूँ और उसके बाद में आपको छोड़ दूंगा, बस आप एक बार मुझे देखने दो।

फिर वो मुझसे ऐसा करने के लिए साफ मना करने लगी, लेकिन तब तक मैंने उनकी साड़ी को खोल दिया था, जिसकी वजह से वो अब मेरे सामने सिर्फ़ पेटीकोट को पहने खड़ी थी और फिर मैंने बिना देर किए उस पेटीकोट को भी झट से खोल दिया। अब वो जिसकी वजह से पूरी नंगी मेरे सामने हो गई थी और में पहली बार उस नंगी उभरी हुई चूत को देखकर ललचाने लगा। अब मैंने उनकी चूत के ऊपर अपने हाथ से सहलाना शुरू किया, मुझे उनके चेहरे की बनावट को देखकर लगने लगा था कि वो अब गरम होकर जोश में आने लगी थी। फिर मैंने कुछ देर चूत को सहलाने के बाद सही मौका देखकर अपनी एक उंगली को चूत के अंदर डाल दिया, मेरी ऊँगली उस गीली, रसभरी, चूत में तुरंत ही फिसलकर अंदर जा पहुंची, जिसकी वजह से मुझे जोश से भरी हुई चूत की गरमाहट के साथ साथ उसके आकार, गहराई का भी पता चला। अब में मन ही मन बहुत खुश होकर चूत के दाने को टटोलने लगा साथ ही ऊँगली को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। तो वो सिसकियाँ लेते हुए आह्ह्हह्ह ऊउफ़्फ़्फ़्फ़ करके कहने लगी अब बस करो ना मुझे दर्द हो रहा है और तुम आजकल बड़े ही बेशरम बदमाश हो रहे हो, अब छोड़ दो तुम मुझे, जाने भी दो। अब मैंने उनकी एक भी बात पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया और मैंने कुछ भी नहीं सुना और में अपनी उंगली को अब उनकी चूत के अंदर बाहर करने लगा। अब मैंने देखकर महसूस किया कि उनकी सांसे अब धीरे धीरे पहले से तेज़ होती जा रही थी और वो जोश में आकर मेरे सर के बालों को खींचते हुए सिसकियाँ लेने लगी। फिर यह सब देखते ही मैंने उनको बेड पर लेटा दिया, में खुद भी अब तुरंत ही पूरा नंगा हो गया और एक बार फिर से मैंने उनको चूमना शुरू किया, जिसकी वजह से वो पागल होने लगी। अब मैंने उनका मूड देखकर उनका एक हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया, तब उनको छूकर जैसे कोई झटका सा लगा वो मन ही मन में सोचने लगी कि क्या मेरा लंड इतना बड़ा, लंबा है वो समझी थी कि सभी का लंड चार, पांच का ही होता होगा, लेकिन मेरा लंड तो उनकी उम्मीद से भी ज्यादा लंबा, मोटा था। अब मैंने कहा कि भाभी मेरा लंड अगर बड़ा नहीं होता तो फिर आपको वो मज़ा कैसे आता? चलो आज में आपको वो असली मज़ा देता हूँ क्या में शुरू कर दूँ? तो वो बोली कि नहीं मुझे इससे बहुत दर्द होगा, तुम्हारा तो मेरे पति से भी ज्यादा बलशाली, मोटा, लंबा है पता नहीं यह अंदर जाते ही क्या करेगा, में इसके दर्द को नहीं सह सकती यह किसी जानवर की तरह है। अब मैंने उनको समझाते हुए कहा कि आप मेरे ऊपर विश्वास रखो में आपको दर्द नहीं होने दूँगा। में बड़े आराम से धीरे धीरे करूंगा, जब दर्द होगा तो में वहीं रुक जाऊंगा। दोस्तों फिर मैंने अपने हाथों से उनके बूब्स को दबाना सहलाना शुरू किया वो जोश में आकर पागल होने लगी, थोड़ी देर के बाद में उनके दोनों पैरों के बीच में बैठ गया और मैंने अपने लंड का टोपा उनकी गीली चूत पर रख दिया। फिर जैसे ही मैंने अपने लंड से चूत के दाने को सहलाना शुरू किया तो उनके बदन में जैसे कोई करंट आने लगा। अब मैंने हल्के हल्के दबाव बनाते हुए अपने लंड को चूत के अंदर डालने की में कोशिश करने लगा और साथ ही साथ में उनके बूब्स को चूसना और मसलना भी शुरू किया। फिर करीब दस मिनट तक सिर्फ़ मैंने अपना आधा ही लंड उनकी चूत के अंदर डाला और में हल्के धक्के के साथ लंड को अंदर बाहर करने लगा। फिर तब तक उन्होंने अपनी चूत का पानी निकाल दिया था।

फिर पानी की वजह से उनकी गीली, चिकनी, चूत को देखकर मैंने एक ही ज़ोर का झटका मारा दर्द की वजह से उनके मुहं से एक ज़ोरदार चीख निकल गई और उनकी आखों से आंसू भी बाहर आने लगे थे। अब मैंने उनके दोनों बड़े आकार के बूब्स को कसकर पकड़कर उनके ऊपर घुड़सवारी करना शुरू किया और मेरा लंड फिसलता हुआ पूरा पूरा चूत के अंदर बाहर होने लगा था। फिर थोड़ी ही देर के बाद वो भी अब दर्द कम होने के बाद अपनी तरफ से मुझे धक्के देने लगी थी, क्योंकि अब उनको मेरे साथ चुदाई का मज़ा आ रहा था और ऐसा सेक्स अनुभव उनको पहले कभी भी नहीं मिला था और साथ ही साथ मुझे भी ऐसा चुदाई का मज़ा पहले कभी नहीं मिला था। दोस्तों हम दोनों पूरे नंगे अकेले ही घर में थे इसलिए हम बेफिक्र होकर मस्त होकर जोश के साथ चुदाई के मज़े लेते रहे और करीब आधे घंटे में वो दो बार झड़ चुकी थी। अब में भी झड़ने वाला था तो मैंने उनको कहा कि अब में झड़ने वाला हूँ आप मुझे बताए में इसको कहाँ निकालूं? तो वो कहने लगी कि तुम मेरे अंदर ही अपना वीर्य डाल दो, तुमने मुझे आज असली प्यार और चुदाई का मज़ा क्या होता है सब कुछ बता दिया है? इसलिए अब आज से में तुम्हारी भी पत्नी हूँ और तुम मुझे हर रोज़ ऐसे ही मज़े से चोदना बस तुम मुझे हमेशा मुझे ऐसे ही यह सब मज़े देना। फिर मैंने अपना पूरा वीर्य उनकी जोश से भरी चूत में डाल दिया और उसके बाद भी में करीब आधे घंटे तक उनके बदन पर ही लेटा रहा और साथ ही में उनके एक बूब्स को चूसता हुआ दूसरे को दबाने सहलाने लगा, जिसकी वजह से हम दोनों ही उस दिन बहुत खुशी महसूस करने लगे थे। दोस्तों तब से लेकर आज तक में अपनी भाभी को अपनी तरफ से बहुत प्यार देकर उनकी चुदाई करता हूँ और जब भी में अपने गाँव जाता हूँ तब में उनको चोदे बिना वापस नहीं आता और वो खुश होकर मेरा पूरा साथ देकर मुझसे अपनी चुदाई के मज़े लेती है ।।

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धन्यवाद …

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