चाचा का परिवार और में

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प्रेषक : राजेश …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राजेश है और अब में शादीशुदा हूँ। दोस्तों आप सभी की तरह में भी कामुकता डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ, सबसे पहले में आप सभी लंड वालों और चूत वालियों को अपने खड़े लंड का नमस्कार करता हूँ। दोस्तों यह कहानी मेरी और मेरी चाची के बीच की है और इस कहानी में जो कुछ भी हुआ वो सब एक सच्ची घटना है, इस कहानी में झूठ का 1% भी चान्स नहीं है यह कहानी 100% सच्ची है। दोस्तों हाँ में आप भी को बताना ही भूल गया कि मेरे लंड का आकार सात इंच लंबा और तीन इंच मोटा है, जो मेरी सबसे बड़ी पहचान है। दोस्तों यह उस समय की बात है जब में 20 साल का था और मेरे चाचा ने मुझे आगे की पढ़ाई करने के लिए अपने पास बुला लिया था और तब में एक कॉलेज में पढ़ता था। दोस्तों मेरी चाची की उम्र 30 साल थी और उनके दो लड़कियाँ थी, एक का नाम सोना जिसकी उम्र छे साल और एक मोना जिसकी उम्र दो साल थी।

दोस्तों मेरे चाचा की नौकरी की वजह से उन्हें अक्सर कई-कई दिन घर से बाहर रहना पड़ता था, चाचा से ज्यादा चाची मेरा बहुत ध्यान रखती थी और में अक्सर चाची के प्यार में बहुत गरमजोशी महसूस करता था। अब जब चाचा घर पर नहीं होते थे, तब चाची मेरे सामने अपनी चुन्नी नहीं पहनती और अक्सर उसकी कमीज का गला खुला हुआ होता था, जिसकी वजह से मुझे हमेशा उसके बड़े आकार के बूब्स का उभार एकदम साफ नजर आता था। फिर में भी छुप छुपकर चाची के बूब्स को देखने की कोशिश किया करता था, क्योंकि ना जाने क्यों मुझे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आता था। एक दिन में कॉलेज से घर आया, तब मैंने देखा कि चाची उस समय कपड़े धो रही थी और चाचा अपनी नौकरी पर थे और उस वजह से वो तीन दिन से घर नहीं आए थे। अब सोना और मोना अपने कमरे में सो रही थी, मैंने अपने कमरे में जाकर अपने कपड़े बदल लिए। फिर उसी समय चाची ने मुझे आवाज़ देकर कहा कि राजेश बेटा जल्दी से कपड़े बदलकर आ जाओ, खाना एकदम तैयार है। फिर में तुरंत ही कपड़े बदलकर बैठक वाले कमरे में आ गया और मैंने देखा कि चाची टेबल पर हमारे लिए खाना लगा रही थी। दोस्तों चाची ने उस समय खुले गले का गाउन का सूट पहना हुआ था और उसके साथ दुपट्टा नहीं था।

अब चाची की कमीज कपड़े धोने की वजह से हल्की सी गीली थी और उनकी कमीज के नीचे ब्रा भी नहीं थी, ऊफफफ्फ वाह वो क्या मस्त द्रश्य था? मेरी नजर हटने को तैयार ही नहीं थी। अब चाची टेबल पर खाना लगा रही थी और मेरी नजरे चाची की छाती पर थी में लगातार उनको घूरकर देखे जा रहा था। दोस्तों वो उनकी कमीज गीली होने की वजह से मुझे चाची का भूरे रंग का निप्पल साफ नजर आ रहा था। अब मेरा सात इंच का लंड मेरे पज़ामे में मचल रहा था, चाची ने भी मेरी घूरती हुई नजरों को देख लिया था कि मेरा पूरा ध्यान उस समय कहाँ था? फिर उसने मेरी तरफ मुस्कुराकर देखा और कहा कि बेटा जी पहले खाना खा लो, फिर उसके बाद तुम मेरे साथ ऊपर चलकर कपड़े सुखवा देना। अब में तो शर्मिंदा होकर खाना खाने लगा और मैंने उस समय गौर किया कि चाची के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। फिर खाना खाने के बाद हम दोनों धुले हुए कपड़े लेकर ऊपर चले गये, हमारी छत पर एक स्टोर रूम भी है, जिसमें हमारे घर का सभी फालतू सामान रखा हुआ होता है। फिर कपड़े सुखाने के बाद चाची ने मुझसे कहा कि राजेश मुझे स्टोर रूम से कुछ सामान लेना है, जरा तुम भी मेरे साथ आना और वो इतना कहकर स्टोर रूम में अंदर चली गयी।

फिर में भी उनके पीछे-पीछे उसी कमरे के अंदर चला गया और जैसे ही में अंदर गया उसी समय एकदम अचानक से चाची ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और उन्होंने मेरे चेहरे और गाल पर चूमना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से में एकदम से घबरा गया। अब चाची अपने जिस्म को मेरे जिस्म से रगड़ रही थी और मुझे चूम रही थी ओह्ह्ह मेरी जान राजेश मुझे पता है कि तुम मुझे पसंद करते हो, आओ मुझे आज दिल भरकर प्यार करो, में भी बहुत तड़पी हुई हूँ, तुम्हारे चाचा तो अब मुझसे बोर हो गये है, उन्होंने पिछले दस महीने से मुझे छुआ तक नहीं है, मुझे पता नहीं वो किस किसके साथ रात गुजार कर आते है? और यह सब कहते हुए चाची ने मेरे होंठो पर चूमना शुरू कर दिया। अब चाची ने मेरा निचला होंठ चूसना शुरू कर दिया, उसके बाद चाची की जीभ मेरे मुँह में आ गयी और अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने चाची को ज़ोर से पकड़ लिया, अब में अपने एक हाथ से चाची की गांड को दबा रहा था और मेरा दूसरा हाथ उसकी कमीज के अंदर से उसके बूब्स पर जा रहा था। अब चाची की जीभ चूसने से मेरी जीभ उसके मुँह में थी, में अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबा रहा था और अपने दूसरे हाथ को उसकी गांड पर फैर रहा था।

फिर धीरे-धीरे चाची ने मेरी कमीज को उतार दिया और मेरी छाती पर चुम्मा करते हुए नीचे की तरफ आने लगी और तब चाची ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा हुआ था। फिर चाची ने नीचे बैठते हुए अपने दांतो से मेरे पजामे का नाड़ा खोल दिया, जिसकी वजह से मेरा पजामा एकदम से नीचे गिर गया और में बिल्कुल नंगा हो चुका था। तभी चाची बोली कि उउउम राजेश तुम्हे नहीं पता कि इस लंड के लिए में कितनी तड़पी हूँ? आज में इसे नहीं छोडूंगी और में इसको तो खा ही जाऊंगी और यह कहते हुए चाची ने सच में मेरे लंड को खाना शुरू कर दिया। अब वो आईसक्रीम की तरह लंड को चाट रही थी लंड के टोपे पर अपनी जीभ को घुमा रही थी। फिर मैंने चाची के सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया, उस समय चाची के हाथ मेरी गांड पर थे और मेरा लंड चाची के मुँह में अंदर बाहर हो रहा था। अब चाची बड़ा मज़ा मज़ा ले लेकर मेरा लंड चूस रही थी और जब में झड़ने लगा तब मैंने चाची से कहा कि अब बस करो में झड़ने वाला हूँ। फिर चाची ने अपने एक हाथ के इशारे से कहा कि आने दो वो और भी ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। अब मेरा गर्म-गर्म लावा उसके मुँह में निकल गया और चाची मेरा सारा लावा आखरी बूंद तक पी गयी उसके बाद जाकर ही चाची ने मेरा लंड अपने मुँह से आज़ाद किया, मेरा लंड अब सिकुड़ना शुरू हो गया।

अब चाची के चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान थी और उसके रसभरे गुलाबी होंठो पर मेरा वीर्य लगा हुआ था, जिसको वो अपनी जीभ से चाट रही थी। तभी चाची ने पूछा कि क्यों जान मज़ा आया? मैंने अपने सर के इशारे से हाँ का इशारा किया। फिर चाची कहने लगी कि अब तुम भी मुझे ऐसे ही मज़ा देना और यह बात कहते हुए चाची ने तुरंत ही अपनी कमीज को उतार दिया और अब अपना एक बूब्स मेरे मुँह की तरफ किया। फिर मैंने उसका एक बूब्स अपने मुँह में ले लिया और उस निप्पल को मैंने चूसना शुरू किया, उस समय मेरा दूसरा हाथ उसके दूसरे बूब्स पर था और में उसके निप्पल को अपनी उँगलियों से दबा रहा था। दोस्तों उस समय चाची की दोनों आंखे बंद थी और वो मज़े ले रही थी, चाची ने मेरे मुँह से अपना बूब्स छुड़वाया और अपना दूसरा बूब्स मेरे मुँह में डाल दिया। अब मैंने भी उसको चूसना शुरू कर दिया, में उसके निप्पल पर हल्का-हल्का काट भी रहा था। तो चाची स्स्स्सईई, ओह्ह्ह मेरे राजा वाह मज़ा आ गया आवाजो के साथ सिसकियाँ ले रही थी। फिर में चाची की तरह उसके जिस्म को चूमता हुआ नीचे की तरफ आ गया और उनकी तरह उसकी सलवार को अपने दातों से मैंने खोल दिया, तब एकदम से उसकी सलवार नीचे आकर गिर गई।

दोस्तों उसके बाद का द्रश्य देखकर मेरे मुहं से वाह क्या चूत है शब्द निकल गए और मैंने देखा कि मेरी चाची जान की चूत एकदम साफ और बहुत मुलायम चूत के होंठ मोटे-मोटे और हल्के गुलाबी रंग के थे और वो हल्की-हल्की गीली हो चुकी थी। फिर मैंने एक चुम्मा उसकी रसभरी चूत पर किया जिसकी वजह से चाची के मुँह से एक लंबी आह सिसकी की आवाज निकली स्स्स्ईईईई आईईईईईईई और फिर चाची ने मेरे सर को ज़ोर से पकड़कर दबा लिया। अब मेरा पूरा मुँह खुला हुआ था और चाची की चूत मेरे मुँह में थी, मेरी जीभ उसकी चूत के अंदर तक जा रही थी ओहह हाँ मेरी जान तुम खा जाओ इसको मज़ा आ गया। अब में ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत को चाट रहा था उस समय चाची का एक पैर मेरे कंधे पर था और उसने मेरा सर अपने दोनों हाथों से पकड़ रखा था। अब मेरे हाथ उसकी गांड पर थे और मेरी एक उंगली उसकी गांड में जा रही थी और तभी अचानक से मेरा मुँह उसके गर्म-गर्म पानी से भर गया। दोस्तों वो बहुत ही अजीब सा था कुछ कड़वा-कड़वा सा और नमकीन सा मुझे उसका स्वाद लगा। अब मैंने महसूस किया कि चाची का पूरा जिस्म हल्के हल्के झटके मार रहा था, चाची नीचे की तरफ झुकी और उन्होंने मेरा सर ज़ोर से पकड़ लिया। अब चाची का सारा पानी मेरे हलक से नीचे उतर चुका था और कुछ देर के बाद चाची ने मेरा मुँह अपनी चूत से आज़ाद किया।

फिर उसका कुछ पानी मेरे मुँह से निकलकर मेरी छाती पर भी आकर गिर गया, मैंने उसकी कमीज से अपना मुँह और अपनी छाती को साफ किया। अब चाची ने मुझे चूमते हुए एक बार फिर से खुश होकर अपनी बाहों में भर लिया और उन्होंने जोश में आकर मेरा लंड पकड़ लिया। अब चाची मेरी जीभ को चूस रही थी, उसकी चूत के पानी का स्वाद अभी तक मेरे मुँह में था जो कि अब उसके मुँह में भी जा रहा था। अब मेरा लंड दुबारा से खड़ा हो चुका था, वहीं उसी कमरे में एक पुराना सा स्टूल पड़ा हुआ था, चाची अपनी कोहनी के बल उस स्टूल पर उल्टी हो गयी और अपने दोनों पैरों को खोल दिया और अब उसकी गांड मेरी तरफ थी। फिर चाची ने अपनी गांड को थोड़ी सी ऊपर किया, में थोड़ा सा नीचे हुआ चाची ने नीचे से अपना एक हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रखा, मैंने एक हल्का सा धक्का दिया जिसकी वजह से मेरे लंड का टोपा ही अंदर गया। दोस्तों मैंने महसूस किया कि मेरी चाची की चूत दो बच्चों के हो जाने के बाद भी अभी तक बहुत टाईट थी। फिर मैंने उसको कमर से पकड़ा और एक ज़ोर से झटका मार दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड फिसलता हुआ उसकी चूत में घुस गया।

तभी चाची ने एक ज़ोर की चीख मारी आहह माँ में मर गई ऊऊईईईईई प्लीज धीरे-धीरे करो, लेकिन फिर भी में जोश में आकर बहुत ज़ोर-ज़ोर से झटके पे झटके मार रहा था। अब चाची की चूत बहुत गीली हो चुकी थी और मेरा लंड उसकी चूत में फिसल फिसलकर अंदर जा रहा था, तभी चाची ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी ओह्ह्ह मेरे राजा आाह्ह्ह्ह तुम बहुत अच्छे हो चोदो तुम मुझे बहुत जमकर मेरी मस्त चुदाई करो आईईईईई और तेज वाह मुझे मज़ा आ रहा है। अब मेरा लंड उसकी चूत में ज़ोर-ज़ोर से अंदर बाहर हो रहा था, मैंने अपने आखरी झटके ज़ोर-ज़ोर से मारे और एकदम से अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। अब चाची के मुँह से सिसकी निकल गयी आहहहह ओह्ह्ह में गई काम से, मैंने फिर उसी समय अपना सारा वीर्य उसकी चूत में ही निकाल दिया। फिर कुछ देर के बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला, देखा कि मेरे लंड पर उसका और मेरा पानी लगा हुआ था। अब चाची ने मुस्कुराते हुए अपनी सलवार से मेरे लंड को साफ किया और फिर हमने आखरी बार चुम्मा किया और फिर अपने-अपने कपड़े पहन लिए। फिर जब हम दोनों उस कमरे से बाहर आए तो मैंने देखा कि अब शाम होने वाली थी और वो धुले हुए कपड़े भी सूख चुके थे।

अब हमने वो कपड़े समेटे और नीचे आ गये, उसी दिन चाचा का रात को फोन आया और वो कहने लगे कि काम की वजह से वो एक सप्ताह के लिए लंदन जा रहे। फिर मैंने और चाची ने पूरे एक सप्ताह तक बहुत मज़े किए, मैंने उसकी वर्जिन गांड को भी अपने लंड की मदद से खोल दिया था। फिर दो साल के बाद मेरे चाचा का प्लेन हादसा हो गया जिसकी वजह से मेरी चाची विधवा हो गयी, लेकिन वो शादी के बिना भी अभी तक मेरी पत्नी है और उससे मेरा एक बेटा भी है जो कि अब पांच साल का है। फिर धीरे-धीरे ऐसे ही समय गुजरता चला गया, हम दोनों हर दिन सेक्स करते और अब तो सोना और मोना भी जवान हो रही है, सोना बिल्कुल अपनी माँ की तरह दिखने लगी है, सोना 21 साल की है और मोना अभी 18 साल की है। फिर मैंने किस तरह से सोना को भी चाची की मदद से चोदा? वो अब में आप सभी को बताता हूँ। फिर चाचा की मौत के बाद में चाची के बेडरूम में शिफ्ट हो गया था, जब चाचा की मौत हुई तब चाची मुझसे पांच महीने की गर्भवती थी और सभी लोगों को बस यही पता था कि यह बच्चा चाचा का है। फिर हमने सबसे पहले तो चाचा का घर बेच दिया और एक नई जगह घर लेकर रहने लगे थे।

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अब में और चाची एक ही बेडरूम में रहते थे, सोना और मोना हमारे साथ वाले कमरे में रहती थी, फिर जब चाची का पांचवा महीना शुरू हुआ तब उसने चुदाई करवाना बंद कर दिया, लेकिन वो कभी-कभी मेरा लंड चूसा करती थी, लेकिन अब मुझे तो चूत की आदत सी हो चुकी थी। अब इसलिए में रोज-रोज के चूसने वाले काम से तंग आ गया था। फिर एक शाम को में बहुत ही गरम था और मौसम भी बहुत ही ख़राब हो रहा था और इसलिए मेरा चूत मारने का बहुत मन कर रहा था। अब सोना और मोना अपने कमरे में स्कूल का काम कर रही थी, तब सोना की उम्र 18 साल थी और मोना 15 साल की थी और चाची रसोई में खाना बना रही थी और में टी.वी पर एक इंग्लिश फिल्म देख रहा था। अब टी.वी पर एक सेक्सी फिल्म चल रही थी और में उसको देख देखकर बहुत ही बैचेन हो रहा था, मैंने करीब दो महीने से चुदाई नहीं की थी और चूसने के खेल में मुझे अब वो मज़ा नहीं आ रहा था। अब मेरा लंड बहुत बैचेन हो रहा था, फिल्म ख़त्म हुई तो में रसोई में चला गया और चाची से कहा कि आज मेरा चूत मारने का बहुत दिल कर रहा है। तभी चाची ने मुझे किसी बच्चे की तरह पुचकारा और बोली कि ओह्ह्ह जानू बस कुछ दिन और इंतजार कर लो, फिर में तुम्हारी सारी अगली पिछली कसर निकाल दूंगी।

अब में चाची को चाची नहीं कहता था बल्कि अब वो मेरी जान बन चुकी थी और जब भी हम अकेले में होते तब में उसको जान ही कहता था। फिर मैंने अपनी जान को उसके पीछे से पकड़ा और अपना लंड उसकी गांड में लगा दिया और बोला कि में तुम्हारी गांड में तो लंड डाल सकता हूँ ना और फिर मैंने अपनी जान को अपनी बाहों में पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया। फिर चाची कहने लगी कि ओह तुम यह क्या कर रहे हो? अभी बच्चे घर में ही है और चाची ने अपने आपको मुझसे छुड़वाना चाहा और बोली कि सब्र करो ना जान, में अभी खाना पकाकर फ्री होती हूँ और फिर उसके बाद में तुम्हारे लंड को ठंडा कर दूंगी, लेकिन में तो उस समय बहुत ही गरम होकर अपने आपे से बाहर हो रहा था। अब मैंने चाची की एक बात भी नहीं सुनी और मैंने उसकी सलवार को खोल दिया और बोला कि छोड़ो जान सब काम बाद में कर लेना, अभी मुझे अपनी गांड मारने दो। फिर मैंने अपना पजामा भी उतार दिया और अपना लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश करने लगा। तभी चाची बोली कि अच्छा प्लीज अभी यहाँ नहीं तुम पहले कमरे में चलो, सोना-मोना घर में ही है और फिर चाची ने मुझे पीछे हटाया और अपनी सलवार ऊपर करने लगी, लेकिन पता नहीं उस समय मुझे क्या हो गया था?

फिर मैंने अपने सारे कपड़े वहीं उतार दिए और चाची को मैंने दोबारा से पकड़ लिया और बोला कि शईई जान कमरे में नहीं, में आज यहीं पर तुम्हारी गांड मारूँगा और मैंने चाची को यह कहते हुए उसकी सलवार को दुबारा से खोल दिया और उसके बूब्स को अपने हाथों में लेकर दबाना शुरू कर दिया। अब चाची मेरी बाहों में थी और में उसको चूम रहा था, कुछ ही देर के बाद चाची ने भी हार मान ली और मेरा लंड पकड़ लिया। अब चाची लंड को चूसना चाहती थी और जबकि में आज उसकी गांड को मारने के चक्कर में था और इसलिए मैंने चाची को रसोई में ही नंगा कर दिया और उसके बूब्स को चूसने लगा। फिर चाची ने मुझसे कहा कि ठीक है जानू, लेकिन में गांड में नहीं ले सकती और सिर्फ लंड चूसकर तुम्हे शांत करुँगी, तुम रात को मेरी गांड मार लेना, क्योंकि जब भी में उसकी गांड मारता था, तब वो बहुत शोर करती थी। फिर मैंने चाची की बात को मान लिया और चाची नीचे बैठकर मेरा सात इंच का लंड चूसने लगी थी। अब चाची को चोद चोदकर मेरा लंड बहुत मोटा और बड़ा हो गया था और चाची भी चूसने में बहुत अनुभव वाली हो गयी थी। अब चाची मेरा पूरा लंड बड़े मज़ा ले लेकर चूस रही थी और में तेज-तेज उसके मुँह में धक्के देकर चोद रहा था, अभी में झड़ने ही वाला था कि तभी अचानक से दरवाजा खुला।

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अब मैंने देखा कि सोना उस समय दरवाजे पर खड़ी हुई थी, वो हम दोनों को ऐसी हालत में देखकर बिल्कुल हैरान रह गयी। अब उसकी आंखे फटी की फटी रह गयी, मैंने और चाची ने भी उसको देख लिया था, उस समय हालत ऐसी थी कि में बिल्कुल आखरी लम्हों में था और हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। अब चाची के मुँह में मेरा पूरा लंड था चाची ने सोना को देखते ही जैसे ही मेरा लंड अपने मुहं से बाहर निकाला, तो में भी उसी समय झड़ गया। अब मेरा सारा वीर्य चाची के चेहरे पर और उसके बूब्स पर गिर गया था और यह सब कुछ एक सेकेंड के अंदर-अंदर हुआ था। दोस्तों सोना का आना और हम दोनों का सोना को देखना और मेरा उसी समय झड़ना, वो बहुत ख़तरनाक समय था। फिर सोना कुछ सेकेंड तो हमे ही देखती रही और फिर भागती हुई वो अपने कमरे में चली गयी, हमे बहुत ज़ोर से दरवाजा बंद होने की आवाज आई। फिर हम दोनों उस समय एकदम चुपचाप मूर्ति बने खड़े थे और चाची ने तुरंत अपना मुँह और अपनी छाती से वीर्य को साफ किया और फिर हमने तुरंत अपने-अपने कपड़े पहन लिए।   फिर चाची ने रोती हुई सूरत से मुझसे कहा कि हाय राम यह तो बहुत ही बुरा हो गया, अब क्या करे? फिर उसी समय मैंने चाची से कहा कि वो सोना के पास जाए और उसको किसी तरह से समझाए, चाची की आँखों में उस समय आँसू थे।

फिर उसने रोते हुए मुझसे कहा कि में उसके सामने कैसे जाऊँ? अब में उसके सामने तो सारी ज़िंदगी नहीं जा सकती, उस समय में भी बहुत परेशान था मेरे भी माथे पर पसीना और चेहरे का रंग उड़ा हुआ था, इसलिए में चुपचाप अपने कमरे में चला गया और मैंने पीना शुरू कर दिया। दोस्तों में और चाची अक्सर दारू भी पीते थे और घर में हर समय एक बोतल हमेशा पड़ी हुई होती थी। अब समय बहुत गुजर चुका था, चाची सोना के कमरे में थी और मुझे नहीं पता था कि उन दोनों के बीच उस समय क्या-क्या बातें हुई? अब मोना खाना खाकर सो चुकी थी, लेकिन मैंने अभी तक खाना नहीं खाया था और में बस कमरे में बैठा हुए सिगरेट और शराब पी रहा था। फिर कुछ देर बाद अचानक से कमरे का दरवाजा खुला और सोना और चाची कमरे के अंदर आ गई, मैंने देखा कि सोना की आंखे रोने की वजह से सूजी हुई थी और चाची भी बहुत परेशान थी। फिर सोना मेरे पास आई और सोफे पर बैठ गयी, सोना-मोना मुझे भाई कहती थी, सोना ने मुझसे कहा कि भाई में किसी को कुछ नहीं बताऊंगी, लेकिन मेरी एक शर्त है। अब में हैरान होकर उसकी तरफ देख रहा था, तभी सोना बोली कि भाई मुझे मम्मी ने सारी बातें बता दी है और मेरे विचार से इसमे आप दोनों का कोई कसूर नहीं है, लेकिन में आप दोनों को उसी समय मांफ करूँगी, जब आप मम्मी के सामने मेरी भी चुदाई करोंगे।

दोस्तों सोना के मुँह से यह शब्द सुनकर मेरा एकदम से दिमाग घूम गया था और मुझे बिल्कुल भी विश्वास नहीं था कि उसने मुझसे यह क्या कहा था? फिर मैंने चाची की तरफ देखा, तो उसकी आँखों में आँसू थे। अब मैंने सोना को समझाना चाहा, लेकिन सोना ने मेरी एक बात भी नहीं सुनी और कहा कि अगर आप यह नहीं कर सकते, तो में यह घर छोड़ दूंगी और सबको बता दूंगी। अब यह बात कहते हुए सोना ने अपनी कमीज को उतार दिया और वो मेरी गोद में बैठ गयी, में उस समय बहुत दुखी था। फिर मैंने चाची की तरफ देखा, वो भी बेबसी से मुझे और अपनी बेटी को देख रही थी। तभी सोना बोली कि चलो ना भाई, अब देर क्यों कर रहे हो? और सोना ने यह कहते हुए अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए और मुझे चूमना शुरू कर दिया। अब सोना की जीभ मेरे मुँह में जा रही थी, मजबूरन मुझे भी उसका साथ देना पड़ा। दोस्तों में तो वैसे ही बहुत दिनों से चूत के लिए तरस रहा था और आज मुझे बिल्कुल कुंवारी चूत खुद चुदाई करने के लिए मिल रही थी। फिर मैंने भी सोना को पकड़ लिया और उसका साथ देने लगा था, धीरे-धीरे मैंने सोना के बूब्स को दबाना शुरू किया और पहले तो उसको बहुत दर्द हुआ, लेकिन बाद में वो मज़े लेने लगी।

ऊफफफफ्फ क्या बूब्स थे सोना के? बिल्कुल मुलायम और उसके गुलाबी-गुलाबी रंग के छोटे आकार के निप्पल में उसका पूरा बूब्स आसानी से अपने मुँह में ले रहा था। अब मेरा एक हाथ सोना की सलवार के अंदर चला गया था, ऊफफफफ क्या गरमी थी सोना की कुंवारी चूत में? सोना अभी तक सलवार में इलास्टिक ही डालती थी, मैंने सोना की सलवार को उतार दिया। अब उसकी कुंवारी चूत पर हल्के-हल्के बाल देखकर तो में बिल्कुल ही पागल हो गया था। फिर मैंने सोना को अपनी गोद में उठाकर पलंग पर लेटा दिया और अपने सारे कपड़े उतार दिए। अब मेरा आठ इंच का लंड सोना की चूत को फाड़ने को बेकरार था, में पलंग के नीचे बैठा और सोना की कुंवारी चूत पर एक चुम्मा किया, तब सोना के मुँह से सस्स्स्स ऊईईईई की एक सिसकी निकल गयी। अब सोना एकदम से मचल गयी थी, मैंने सोना की छोटी सी चूत के गुलाबी होंठो को खोला और अपनी जीभ से पागलों की तरह में उसको चाटने चूसने लगा था। अब चाची सामने सोफे पर बैठी हुई हमारी वो सारी कारवाई बड़े ही ध्यान से देख रही थी, पूरे कमरे में सोना की सिसकियाँ गूँज रही थी ऊऊह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उऊम्म्म्मा आहहह्ह्ह। फिर में सोना का पूरा जिस्म चाटता हुआ सोना के ऊपर लेट गया, मेरी छोटी सी जान सोना आज मेरे नीचे थी और में उसको चूम रहा था।

अब सोना मेरे बालों में अपने हाथ को फैर रही थी और उसी समय मेरी नजर चाची पर पड़ी, में यह देखकर हैरान रह गया कि चाची ने अपने बूब्स को बाहर निकाले हुए थे और वो अपने निप्पल को मसल रही थी। फिर मैंने चाची को इशारे से अपने पास बुलाया और चाची से कहा कि वो सोना की चूत को सक करे, चाची पलंग के नीचे बैठी और अपनी बेटी की चूत को चूसने लगी। अब में सोना के बूब्स को चूस रहा था, सोना की आंखे बंद थी और उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी, चाची सोना की चूत को चूस रही थी और मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा हुआ था। तभी सोना बोली कि ऊऊऊम भाई चोदो मुझे, अब सोना इस समय बहुत गरम हो चुकी थी और उसकी चूत से हल्का-हल्का पानी निकल रहा था। फिर मैंने चाची से कहा कि वो कोल्ड क्रीम लेकर आए, मैंने सोना की कमर के नीचे एक तकिया रखा और चाची ने बहुत सारी क्रीम मेरे लंड पर और सोना की चूत पर लगाई। फिर मैंने अपना लंड सोना की चूत पर रखा और हल्का सा अंदर किया, सोना दर्द की वजह से एकदम से चीखने लगी और थोड़ी टेड़ी हो गयी और अपने दोनों पैरों को उसने बंद कर लिया ऊफ्फ्फ भाई में मर जाऊंगी, यह बहुत बड़ा है मुझे चुदाई नहीं करवानी प्लीज आप मुझे अब जाने दो, लेकिन अब में यह मौका तो नहीं छोड़ सकता था।

फिर मैंने चाची को इशारा किया, तब चाची सोना के ऊपर बैठ गयी और चाची का मुँह मेरी तरफ था। फिर चाची ने अपनी बेटी के दोनों पैरों को खोल दिया और मैंने अपना लंड पकड़कर सोना की चूत के मुहं पर रखा और हल्का सा एक झटका मारा। अब सोना चीखने लगी आऊऊऊ आऊच प्लीज आह्ह्ह अब छोड़ दो मुझे। फिर मैंने एक और हल्का सा झटका मारा, जिसकी वजह से मेरे लंड का टोपा सोना की चूत में चला गया, मैंने चाची को सोना के ऊपर से हटा दिया और खुद सोना के ऊपर लेट गया। अब सोना रो रही थी और चाची ने पीछे से आकर सोना के दोनों पैरों को पकड़ लिया था। फिर मैंने सोना को उसके कंधो से पकड़ा और ज़ोर लगाने लगा उफफ्फम ऊफफफ्फ उसकी इतनी टाईट चूत थी कि में क्या बताऊं? फिर मैंने सोना के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और धीरे-धीरे में अपना लंड सोना की चूत में डालने लगा, लेकिन अब मेरा लंड अंदर जा ही नहीं रहा था। अब मेरा आधा लंड सोना की चूत के अंदर फंसा हुआ था, मैंने चाची से कहा कि वो और क्रीम मेरे लंड पर लगाए। फिर चाची ने पीछे से मेरे लंड पर दोबारा क्रीम लगाई, मैंने एक ज़ोर से झटका मारा तो मेरा लंड सोना की चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर जाने लगा।

अब सोना ज़ोर से चिल्लाई आईई आहहहहहह और सोना की आंखे और मुँह बहुत ज्यादा खुल गए थे और उसकी आँखों से आसूँ भी निकलने लगे थे और अब सोना की चूत से खून भी निकलने लगा था। अब सोना चीखे मार रही थी, लेकिन मैंने उसके मुँह में अपना मुँह दिया हुआ था, मेरा लंड बड़ी आसानी से सोना की चूत में जा रहा था। अब मेरा लंड सोना की चूत को फाड़ता हुआ अंदर चला गया ऊफफफ वाह मस्त कुंवारी चूत मारने का अपना ही मज़ा होता है। अब सोना भी जोश में आकर मेरा साथ देकर चुदाई के मज़े ले रही थी और चाची अपने सामने अपनी बेटी को चुदता हुआ देख रही थी और चाची भी मजे ले रही थी, उसने अपनी सलवार में अपना एक हाथ डाला हुआ था। अब में ज़ोर-ज़ोर से सोना की चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था, जिसकी वजह से सोना को भी मज़ा आने लगा था और वो भी मेरी कमर को अपने दोनों हाथों से दबा रही थी और बोल रही थी आह्ह्ह्ह भाई चोदो मुझे आईईईईई आज तुम जमकर मेरी चुदाई करो बुझा दो मेरी प्यास को मेरी इस चूत को शांत कर दो। अब में खुश होकर झटके पे झटके मार रहा था, सोना की चूत से पानी निकलना शुरू हो गया था आईईईईईईईई ज़ोर से आह्ह्ह्ह।

अब सोना ने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और मेरी गर्दन पर ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगी थी और में भी झड़ने लगा था, मेरी गति बहुत तेज हो गयी। फिर थोड़ी देर के बाद मेरा पानी सोना की चूत में ही निकल गया, मेरे पानी के फव्वारे निकलते ही जा रहे थे। अब मेरा पूरा लंड सोना की चूत में अंदर था, में उसके बाद शांत होकर सोना के ऊपर ही लेट गया और अपनी जान सोना को चूमने लगा था। अब सोना की गर्दन पर, बूब्स पर, चेहरे पर चूमने के निशान पड़ चुके थे, जब में उसके ऊपर से उठा तो मेरे पेट तक सोना का खून लगा हुआ था। अब मेरा लंड सोना के पानी और खून से भीगा हुआ था, पूरी चादर और तकिये भी गंदे हो चुके थे। फिर चाची ने एक टावल गरम पानी से गीला करके सोना की चूत को हल्के-हल्के दबाने लगी और फिर में उठकर बाथरूम में चला गया। फिर थोड़ी देर के बाद हम तीनों ने मिलकर एक साथ खाना खाया, मैंने देखा कि सोना बहुत खुश थी और खाना खाने के बाद चाची तो सोना के कमरे में चली गयी। अब में और सोना सारी रात प्यार करते रहे, मैंने उसी रात में सोना को लंड चूसना भी सीखा दिया और एक बार मैंने उसकी वर्जिन गांड भी मारी ।।

धन्यवाद …

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